राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने पर वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा सुविधाजनक रूप से Legislature में दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन पर आधारित विलय की तथाकथित ‘कानूनी कल्पना’ का हवाला दे रहे हैं, जो संवैधानिक मायने में दो दलों के वास्तविक विलय को स्थापित करने में विफल है. उन्होंने ये भी कहा कि अब दल-बदल विरोधी कानून के ढांचे पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है.
उन्होंने कहा, ”दसवीं अनुसूची के तहल दल-बदल रोधी प्रावधान विधायकों को अयोग्यता से सिर्फ विशिष्ट संख्यात्मक शर्तों के तहत विलय मानकर ही बचाता है. यह स्वयं राजनीतिक दलों के वास्तविक विलय को प्रभावी नहीं बनाता है.”
Raghav Chadha is conveniently referring to the so-called “legal fiction” of merger based solely on the support of two-thirds of the members in legislature, which fails to establish a genuine merger of two parties in the constitutional sense.
The anti-defection provision under… https://t.co/CHsDCBtt2U
— Prakash Ambedkar (@Prksh_Ambedkar) April 24, 2026
‘दो दलों के बीच विलय संपूर्ण राजनीतिक दल के स्तर पर हो’
प्रकाश अंबेडकर ने आगे कहा, ”दो दलों के बीच विलय संपूर्ण राजनीतिक दल के स्तर पर होना चाहिए, न कि सिर्फ उसके विधायी दल या उसके विधायी प्रतिनिधियों द्वारा. राजनीतिक दल राष्ट्रीय, राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक इकाइयों वाली संरचित संस्थाएं हैं. किसी भी वैध विलय के लिए पार्टी के संविधान के अनुसार लिया गया निर्णय और सभी स्तरों पर उसके सक्षम संगठनात्मक निकायों द्वारा अनुमोदित होना जरूरी है.”
‘दल-बदल रोधी ढांचे पर पुनर्विचार करने का समय’
उन्होंने ये भी कहा, ”मेरा मानना है कि दल-बदल रोधी ढांचे पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है, क्योंकि इसकी कई अलग-अलग व्याख्याएं की जा सकती हैं, जिससे रणनीतिक इस्तेमाल या दुरुपयोग की गुंजाइश बनती है.”
AAP से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार (24 अप्रैल) को पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और बीजेपी में शामिल हो गए. राघव चड्ढा ने बकायदा संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फेंस की. इस दौरान राघव चड्ढा, पाठक और मित्तल ने दावा किया कि आप के दस में से सात राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ दी है. राघव चड्ढा ने इसे ‘आप’ के दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का बीजेपी में विलय बताया है.
राघव चड्ढा ने ये भी बताया कि भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने भाजपा में विलय कर लिया है। सात सांसदों ने उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्यसभा के अध्यक्ष को सौंपा गया. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी पर जमकर बरसे और केंद्र सरकार की जमकर तारीफ भी की.
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