राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय वार्षिक ‘अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक’ (दिवाली बैठक) इस बार मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित होने जा रही है. 3 से 5 अक्टूबर तक चलने वाली यह बैठक संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की आखिरी प्रमुख बैठक होगी, जिसे संगठन के भावी स्वरूप और ढांचागत सुधारों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस उच्च स्तरीय बैठक में देश भर के सभी 46 प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे. बैठक के दौरान संघ के विभिन्न अभियानों, शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों और आगामी संगठनात्मक रणनीतियों की समीक्षा की जाएगी.
संगठनात्मक ढांचे में होगा बड़ा बदलाव
सूत्रों के अनुसार, इस दिवाली बैठक के बाद संघ के भीतर ढांचागत स्तर पर बड़े बदलावों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इस नए निर्णय के तहत संघ की दशकों पुरानी’प्रांत प्रचारक’ व्यवस्था को समाप्त कर दिया जाएगा.
नए संगठनात्मक ढांचे के लागू होने के बाद अब प्रांत प्रचारक की जगह ‘संभागीय प्रचारक’ व्यवस्था काम करेगी. इस कदम का मुख्य उद्देश्य संघ के बढ़ते कार्य विस्तार को प्रशासनिक और व्यावहारिक रूप से अधिक सुचारू, प्रभावी और विकेंद्रीकृत बनाना माना जा रहा है. तीन दिनों तक चलने वाले इस मंथन शिविर में सरसंघचालक और सरकार्यवाह सहित संघ के सभी शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे, जहां से संघ के शताब्दी वर्ष के संकल्पों को जमीन पर उतारने की नई रूपरेखा तय होगी.
अमेरिका में मोहन भागवत का कार्यक्रम
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत इस समय अमेरिका में हैं. वह न्यूयॉर्क शहर में 29 अगस्त को आयोजित होने वाले एक बड़े हिंदू समुदाय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जिसका उद्देश्य एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देना है. आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम में लोगों से समाज में मौजूद विभाजनों से ऊपर उठने, मानवता को जोड़ने वाले संबंधों को पहचानने और आपसी सम्मान, सद्भाव और एकता को अपनाने का आह्वान किया जाएगा.
कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों से जुड़े वक्ता भी शामिल होंगे और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी. इस सम्मेलन का प्रमुख आधार भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ होगा, जिसका अर्थ है ‘संपूर्ण विश्व एक परिवार है.’ आयोजकों के अनुसार, इस विचार को आधुनिक चुनौतियों का सामना संवाद, आपसी सम्मान, साझा जिम्मेदारी और सेवा भावना के माध्यम से करने के एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा. कार्यक्रम में अलग-अलग भाषाई, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग हिस्सा लेंगे
