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Sadhguru Intelligence: क्या हर बात में ‘Confident’ होना बेवकूफी है? सद्गुरु की बात खोल देगी आंखें


How Uncertainty Helps In Personal Growth: हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां 5 साल की योजना को सफलता का पैमाना माना जाता है. स्कूल के दिनों से ही हम पर दबाव डाला जाता है कि हम तय करें कि जिंदगी में क्या करना है, उसी रास्ते पर टिके रहें और यह दिखाएं कि हमें सब कुछ पहले से पता है. अनिश्चितता को कमजोरी या भटकाव की तरह देखा जाता है. लेकिन अगर इतिहास के सबसे तेज दिमागों को देखें, तो वे कभी किसी एक तय नक्शे पर नहीं चले. उनके पास सिर्फ दिशा थी और ढेर सारे सवाल.

इसी सोच को जग्गी वासुदेव ने एक तीखे लेकिन गहरे कथन में रखा है. उनका कहना है कि असली समझदारी वही है, जिसमें इंसान लगातार सवाल करता रहे. जो लोग हर चीज को लेकर पूरी तरह आश्वस्त रहते हैं, वे दरअसल सीखना बंद कर देते हैं. यह बात थोड़ी चुभ सकती है, क्योंकि हमें हमेशा पूरी तरह निश्चित होने को ही सुरक्षित माना गया है.

कब इंसान देखने का नजरिया बंद कर देता है?

जब कोई व्यक्ति यह मान लेता है कि उसे सब कुछ पता है, तो वह नए नजरिए देखना बंद कर देता है. ऐसे लोग अपने ही बनाए ढांचे में कैद हो जाते हैं. इसके उलट, जो लोग लगातार सोचते और सवाल करते हैं, उनका दिमाग खुला रहता है. वे बदलाव को जल्दी समझते हैं, नई जानकारी को अपनाते हैं और आने वाली मुश्किलों को पहले ही पहचान लेते हैं.

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साइकोलॉजी क्या कहती है?

साइकोलॉजी भी इस बात को सही ठहराता है. एक सिद्धांत बताता है कि जो लोग किसी विषय को कम जानते हैं, वे अक्सर खुद को ज्यादा आत्मविश्वासी समझते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी सीमाओं का अंदाजा नहीं होता. वहीं, जो लोग वास्तव में जानकार होते हैं, वे ज्यादा सतर्क रहते हैं क्योंकि उन्हें जटिलताओं की समझ होती है. नेचर पत्रिका में पब्लिश हालिया रिसर्च में यह भी सामने आया कि जो लोग अनिश्चितता के साथ सहज रहते हैं, वे बदलाव के साथ जल्दी तालमेल बैठा लेते हैं. आज के समय में, जब तकनीक और नौकरियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, यह लचीलापन बहुत जरूरी हो गया है. अगर कोई यह मानकर चलता है कि उसकी नौकरी या स्थिति हमेशा एक जैसी रहेगी, तो वह असल बदलावों को नजरअंदाज कर रहा है. 

हमें क्या होना चाहिए?

ऐसे में जरूरी है कि हम सही होने की बजाय जिज्ञासु होने पर ध्यान दें. जब भी किसी सवाल का जवाब पूरी तरह साफ न हो, तो यह स्वीकार करना कि मुझे अभी पूरी जानकारी नहीं है कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है. इसी तरह, बड़े फैसले लेते समय अलग-अलग संभावनाओं पर विचार करना भी जरूरी है. छोटे-छोटे प्रयोग करना भी इस सोच का हिस्सा है. जिंदगी को एक प्रयोगशाला की तरह देखने से असफलता डरावनी नहीं लगती, बल्कि सीखने का मौका बन जाती है.

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