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Surekha Yadav India First Woman Loco Pilot: देश की पहली महिला लोको पायलट कैसे बनी थीं सुरेखा यादव, जानें कितनी मिलती थी सैलरी?


Surekha Yadav India First Woman Loco Pilot: भारत में एक समय ऐसा भी था जब ट्रेन चलाना पूरी तरह पुरुषों का पेशा माना जाता था. ऐसे दौर में एक महिला ने इस सोच को बदल कर इतिहास रच दिया. वह महिला सुरेखा यादव हैं, जिन्होंने न सिर्फ भारतीय रेलवे में अपनी जगह बनाई बल्कि देश की पहली महिला लोको पायलट बनकर लाखों महिलाओं को प्रेरित किया. तो आइए जानते हैं कि सुरेखा यादव देश की पहली महिला लोको पायलट कैसे बनी थीं और सैलरी कितनी मिलती थी. 

कहां हुआ था सुरेखा यादव का जन्म?

सुरेखा यादव का जन्म 1965 में महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था. उनका परिवार खेती से जुड़ा था और आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं था, लेकिन उनके माता-पिता की सोच काफी बड़ी थी. उन्होंने सुरेखा को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया. सुरेखा बचपन से ही मेहनती थीं. वह घर और खेत के काम में मदद करने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी लगन से करती थीं. आगे चलकर उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया. 

सुरेखा यादव देश की पहली महिला लोको पायलट कैसे बनी थीं?

पढ़ाई पूरी करने के बाद सुरेखा नौकरी की तलाश में थीं. तभी उन्होंने अखबार में भारतीय रेलवे की भर्ती का एक विज्ञापन देखा. उन्होंने बिना ज्यादा सोचे इस नौकरी के लिए आवेदन कर दिया. उन्हें उस समय यह नहीं पता था कि इस क्षेत्र में कोई महिला नहीं है. उन्होंने सिर्फ एक अवसर के रूप में इसे लिया और परीक्षा पास कर ली. 1989 में उन्हें सहायक लोको पायलट की नौकरी मिल गई. 

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अकेली महिला लोको पायलट का सफर कैसा रहा?

जब सुरेखा ट्रेनिंग के लिए पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि पूरी कक्षा में वह अकेली लड़की थीं. यह उनके लिए चौंकाने वाला अनुभव था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और तय किया कि अब पीछे नहीं हटेंगी. शुरुआती साल उनके लिए काफी मुश्किल रहे. उन्हें काम सीखने के साथ-साथ खुद को साबित भी करना था. इस नौकरी में हर समय सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि एक छोटी सी गलती भी बड़ा हादसा कर सकती है. सुरेखा ने धीरे-धीरे अपने काम में महारत हासिल कर ली. 1996 में उन्हें लोको पायलट बना दिया गया. इसके बाद उन्होंने मालगाड़ी, एक्सप्रेस ट्रेन और मुंबई लोकल जैसी कई ट्रेनों को चलाया. वह एशिया की पहली महिला बनीं जिन्होंने ट्रेन चलाई, आगे चलकर उन्होंने वंदे भारत और राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रतिष्ठित ट्रेनों को भी चलाया. 36 साल तक रेलवे में सेवा देने के बाद सुरेखा यादव 2025 में रिटायर हो गईं. उन्होंने अपने करियर के आखिरी दिन राजधानी एक्सप्रेस चलाई. 

कितनी मिलती थी सैलरी?

शुरुआत में सहायक लोको पायलट की सैलरी कम होती है. पहले यह लगभग 25,000 के आसपास होती थी. जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, सैलरी भी बढ़ती जाती है. एक अनुभवी लोको पायलट को 1 लाख या उससे ज्यादा तक वेतन मिल सकता है, खासकर जब वह बड़ी और तेज ट्रेनों को चलाता है. 

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