Thalapathy Vijay MLA Seats : तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय ने 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में ऐसा राजनीतिक प्रदर्शन किया है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 234 सदस्यीय विधानसभा में 100 से ज्यादा सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति का समीकरण ही बदल दिया. विजय ने खुद दो सीटों पेरम्बूर सीट और तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत हासिल की, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या विजय को दो सीटें जीतने पर डबल सैलरी मिलेगी. इस सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है. लोगों के मन में यह सवाल है कि जब एक नेता दो जगहों से विधायक बन जाता है, तो क्या उसे दोनों सीटों की तनख्वाह और सुविधाएं मिलती हैं. तो आइए जानते हैं कि दो जगहों से विधायक चुने गए थलपति विजय को क्या डबल सैलरी मिलेगी और इसको लेकर नियम क्या है.
क्या विजय को मिलेगी डबल सैलरी?
भारत में किसी विधायक या सांसद को सिर्फ एक पद की ही सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं. कोई नेता दो सीटों से जीत जाए, लेकिन वह दोनों सीटों का विधायक नहीं रह सकता है. इसलिए उसे सिर्फ एक सीट के हिसाब से ही वेतन, भत्ता और सरकारी सुविधाएं मिलेंगी.
क्या कहता है कानून?
भारत में चुनाव संबंधी नियम Representation of the People Act, 1951 यानी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत तय होते हैं. इस कानून के अनुसार कोई उम्मीदवार एक चुनाव में अधिकतम दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है. पहले ऐसा नियम नहीं था. 1996 से पहले नेता कई सीटों से चुनाव लड़ लेते थे, लेकिन बाद में कानून बदला गया और अधिकतम दो सीटों की सीमा तय की गई. ऐसे में अगर कोई उम्मीदवार दो सीटों से जीत जाता है, तो वह दोनों सीटें अपने पास नहीं रख सकता है. उसे तय समय के भीतर एक सीट छोड़नी होती है. अगर वह ऐसा नहीं करता, तो दोनों सीटें खाली मानी जा सकती हैं.
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नेता दो सीटों से चुनाव क्यों लड़ते हैं?
राजनीतिक दल और बड़े नेता कई रणनीतिक कारणों से दो सीटों से चुनाव लड़ते हैं. अगर एक सीट पर हार हो जाए तो दूसरी सीट से जीत सुनिश्चित रहे. विजय ने चेन्नई और मध्य तमिलनाडु दोनों क्षेत्रों में अपनी पकड़ दिखाने के लिए दो सीटें चुनीं. दो जगह लड़ने से आसपास की सीटों पर भी पार्टी को फायदा मिलता है.
विजय किस सीट को रख सकते हैं?
अभी तक विजय ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. लेकिन विजय ऐसी सीट रख सकते हैं जहां से भविष्य में पार्टी को ज्यादा राजनीतिक फायदा मिले. वहीं जिस सीट को विजय छोड़ेंगे, वहां दोबारा चुनाव यानी उपचुनाव कराया जाएगा. कानून के मुताबिक आमतौर पर 6 महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाता है. विजय की जीत के बाद फिर से वन कैंडिडेट, वन कांस्टीट्यूएंसी यानी एक उम्मीदवार, एक सीट की बहस तेज हो गई है. कई लोग मानते हैं कि दो सीटों से चुनाव लड़ना लोकतंत्र पर अतिरिक्त बोझ डालता है.
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