- बीजेपी 2027 चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में आक्रामक रणनीति अपना रही है.
- पीएम मोदी के दौरे पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल और अवध क्षेत्रों पर केंद्रित रहे.
- विकास योजनाओं के लोकार्पण/शिलान्यास से जनाधार बढ़ाने का प्रयास जारी है.
- समाजवादी पार्टी भी 2027 के लिए अखिलेश यादव के नेतृत्व में सक्रिय है.
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम का वक्त बचा है. इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है. बीते 1 महीने के भीतर राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन अहम दौरे हुए. इन दौरों के जरिए बीजेपी ने राज्य के तीन अहम क्षेत्रों को कवर कर लिया है.
पीएम मोदी की सबसे पहली सभा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन के संदर्भ में 28 मार्च को हुई. उसके बाद पीएम मोदी 28 अप्रैल को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे. अब 29 अप्रैल को पीएम मोदी हरदोई में सभा करेंगे.
जेवर के जरिए बीजेपी ने पश्चिमी यूपी, वाराणसी के रास्ते पूर्वांचल और हरदोई से अवध को साध रही है. तीनों ही कार्यक्रमों में या तो करोड़ों की योजनाओं का लोकार्पण हुआ या फिर शिलान्यास. बीजेपी राज्य में यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह पिछली सरकारों के मुकाबले विकास की परियोजनाओं पर ज्यादा फोकस कर रही है.
दरअसल, बीजेपी इन रैलियों और योजनाओं के उद्घाटन शिलान्यास के जरिए सिर्फ विकास केंद्रित सरकार का दावा और वादा पूरा करने की कोशिश नहीं कर रही बल्कि अपने खिसके हुए जनाधार को भी ठीक करने जुगत में है.
पूर्वांचल, अवध और पश्चिम में क्या थे हाल?
सबसे पहले बात करते हैं पूर्वांचल की. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में क्षेत्र के 10 जिलों की 29 सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर अपना परचम लहराया. वहीं, समाजवादी पार्टी ने 2017 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया. 2017 के चुनाव में पार्टी को जहां 12 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 31 तक पहुंच गया.
लोकसभा चुनाव की भी बात करें तो 12 में से 9 सीटों पर सपा की साइकिल चली और सिर्फ 2 पर ही कमल खिल पाया. 1 सीट पर अपना दल (एस) ने जीत हासिल की थी. पूर्वांचल में बीजेपी जो दो सीटें जीती थी, उसमें एक वाराणसी और दूसरी भदोही.
अब बात अवध की बात करें तो 2024 के आम चुनावों में बीजेपी 20 में से सिर्फ 8 पर जीत सकी थी. 2019 के चुनाव में वह 17 सीटों पर जीती थी. 2024 के चुनाव में जो सीटें सपा और कांग्रेस के अलायंस ने जीती उसमें अमेठी, अंबेडकर नगर, बाराबंकी, धौरहरा, फैजाबाद, खीरी, मोहनलालगंज, प्रतापगढ़, रायबरेली, श्रावस्ती, सीतापुर और सुल्तानपुर जिले शामिल हैं. हालांकि विधानसभा चुनाव 2022 में अवध ने बीजेपी को राहत दी थी और साल 2017 के मुकाबले वह 17 सीटें ज्यादा जीती थी.
पश्चिमी यूपी में बीजेपी को 2022 में तगड़ा झटका लगा था. क्षेत्र की 136 सीटों में से 2017 के चुनाव में 110 जीतने वाली बीजेपी को 2022 में सिर्फ 93 सीटें मिल पाईँ थीं. वहीं सपा का आकंड़ा 2017 के मुकाबले 20 से बढ़कर 43 हो गया था.
सपा की क्या है रणनीति?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में लोकसभा व विधानसभा चुनावों में हुए नुकसान, साथ ही लोकसभा चुनाव के दौरान अवध क्षेत्र में लगे झटकों की भरपाई के लिए बीजेपी 2027 को ध्यान में रखते हुए अब क्षेत्रवार रणनीति पर फोकस कर रही है.
उधर, बीजेपी की इन रणनीतियों के बीच समाजवादी पार्टी भी एक्टिव है. 28 मार्च को जेवर में पीएम की जनसभा के बाद 29 मार्च को गौतमबुद्ध नगर स्थित दादरी में अखिलेश यादव की रैली थी. इसके अलावा वह अलग-अलग जिलों का दौरा खुद कर रहे हैं. वह जल्द ही गाजीपुर भी जाने वाले हैं.
ऐसे में दोनों ही दल अपने फायदे नुकसान को देखते हुए 2027 की रणनीति बना रहे हैं. यह देखना होगा कि वर्ष 2027 के चुनाव में बीजेपी अपनी इन रणनीतियों के जरिए कितना बेहतर परिणाम ला सकती है.
