देहरादून की सड़कें मंगलवार (28 अप्रैल) की शाम हजारों महिलाओं के जोश और आक्रोश से गूंज उठीं. गांधी पार्क से घंटाघर तक निकली महिला आक्रोश मशाल यात्रा ने साफ कर दिया कि महिला आरक्षण कानून को गिराने की कीमत राजनीतिक दलों को चुकानी होगी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में निकली इस यात्रा में माताएं, बहनें और बेटियां सब एक साथ, एक आवाज में सड़कों पर थीं. हाथों में मशालें, होठों पर नारे और आंखों में एक दृढ़ संकल्प यह नजारा बता रहा था कि यह कोई सामान्य रैली नहीं थी.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि यह मशाल यात्रा किसी के इशारे पर नहीं निकली, यह उस गुस्से की अभिव्यक्ति है जो उन ताकतों के खिलाफ है जो महिलाओं को उनका हक देने से बार-बार मुंह मोड़ती रही हैं. उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से लटका रहा, वादे होते रहे, राजनीति होती रही लेकिन अधिकार नहीं मिले. जब केंद्र सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए, तो कुछ दलों ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इसमें अड़ंगा लगाने का काम किया. जनता यह सब देख रही है और समझ रही है.
विपक्ष पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप
सीएम धामी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दल परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति करते हैं, उन्हें महिलाओं की असली भागीदारी से डर लगता है. इसीलिए वे हर बार किसी न किसी बहाने से महिला आरक्षण की राह में रोड़े अटकाते रहे. लेकिन अब नई पीढ़ी की महिलाएं इन चालों को भली-भांति पहचान चुकी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आज की भारतीय नारी सिर्फ वोट देने वाली शक्ति नहीं रही, वह निर्णय लेने वाली शक्ति बन चुकी है और यही बात कुछ दलों को असहज करती है.
महिलाओं की प्रगति ही प्रदेश का विकास
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार मातृशक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए हर कदम पर खड़ी है. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रयास अब जमीन पर दिखाई दे रहे हैं यह काम केवल भाषणों और कागजों तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि जब नारी आगे बढ़ती है, तो परिवार आगे बढ़ता है और जब परिवार आगे बढ़ता है, तो प्रदेश और देश आगे बढ़ता है.
घंटाघर तक उमड़ा जनसैलाब
इस दौरान राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सविता कपूर, आशा नौटियाल सहित तमाम जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. प्रदेश भर से आई महिलाओं की भारी भीड़ ने इस आयोजन को एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया. गांधी पार्क से उठी मशालों की रोशनी जब घंटाघर तक पहुंची, तो एक बात साफ थी यह यात्रा सिर्फ एक विरोध नहीं, एक चेतावनी थी. चेतावनी उन सभी के लिए जो समझते हैं कि महिलाओं के अधिकारों को अनिश्चितकाल तक टाला जा सकता है.
