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Vedic Astrology: देर से सफलता पाने वालों की कुंडली में क्या होता है अलग? जानिए कौन से ग्रह संघर्ष के बाद दिलाते हैं बड़ी सफलता


Vedic Astrology: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान चाहता है कि उसकी मेहनत का फल उसे तुरंत मिल जाए. आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग बेहद कम उम्र में बड़ी सफलता हासिल कर लेते हैं, जबकि कुछ लोगों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए लंबा और कड़ा संघर्ष करना पड़ता है.

वैदिक ज्योतिष में इसे सिर्फ ‘किस्मत का खेल’ नहीं माना गया है. कुंडली में कुछ ग्रह ऐसे होते हैं जो व्यक्ति को शॉर्टकट से सफलता नहीं देते. ये ग्रह पहले इंसान को मानसिक, भावनात्मक और कर्म के स्तर पर तराशते हैं. यही संघर्ष आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनता है. आइए जानते हैं कि कुंडली के कौन से ग्रह सफलता में देरी लाते हैं और इसके पीछे का ज्योतिषीय रहस्य क्या है.

शनि देव क्यों देते हैं देर से सफलता?

वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्म, अनुशासन, धैर्य और न्याय का कारक माना गया है. शनि देव की चाल सबसे धीमी है, इसलिए इनका प्रभाव भी जीवन में धीरे-धीरे ही दिखाई देता है. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि का प्रभाव इन स्थितियों में हो, तो उसे शुरुआती जीवन में कड़ा संघर्ष करना पड़ता है:

लग्न पर प्रभाव: जब शनि देव का सीधा प्रभाव लग्न (व्यक्तित्व) पर हो.

10वें भाव से संबंध: शनि का कुंडली के 10वें भाव यानी कर्म भाव से जुड़ना.

चंद्र-शनि का संबंध: कुंडली में शनि और चंद्रमा का संबंध (विष योग) बन रहा हो.

शुरुआती महादशा: अगर बचपन या कम उम्र में ही शनि की महादशा शुरू हो जाए.

  • क्यों फायदेमंद है यह देरी? शनि ग्रह व्यक्ति को सफलता देने से पहले उसके अंदर का अहंकार तोड़ते हैं. वे इंसान को धैर्य सिखाते हैं और कड़ी मेहनत की आदत डालते हैं. यही वजह है कि शनि से प्रभावित लोग जीवन के दूसरे भाग (30 या 36 वर्ष की उम्र के बाद) में ज्यादा सफल और स्थापित होते हैं.

राहु ग्रह: महत्वाकांक्षा, उलझन और भटकाव का खेल

राहु को ज्योतिष में भ्रम, अचानक होने वाली घटनाओं और असामान्य इच्छाओं का ग्रह माना गया है. राहु व्यक्ति को बहुत बड़ा सोचने की क्षमता तो देता है, लेकिन साथ ही ‘दिशा भ्रम’ (Confusion) भी पैदा करता है.

विशेषकर जब कुंडली में शनि और राहु का संबंध बनता है, तो संघर्ष और गहरा हो जाता है. ऐसे में व्यक्ति को महसूस होता है कि वह मेहनत तो पूरी कर रहा है, लेकिन परिणाम उम्मीद से बहुत दूर हैं. राहु से प्रभावित व्यक्ति में आमतौर पर ये लक्षण दिखते हैं:

  • जल्दी सफलता पाने की अत्यधिक चाह होना.
  • जल्दी-जल्दी अपने करियर या लक्ष्य को बदलना.
  • दूसरों की तरक्की देखकर मन में बेचैनी होना.
  • मानसिक अस्थिरता और भ्रम की स्थिति रहना.

यह कॉम्बिनेशन व्यक्ति को असाधारण भी बनाता है. राहु जहां व्यक्ति को बड़े सपने देखने की हिम्मत देता है, वहीं शनि देव उन सपनों को हकीकत में बदलने का अनुशासन प्रदान करते हैं.

कुंडली के ये 5 संकेत, जो शुरुआत में संघर्ष लेकिन बाद में देते हैं अपार सफलता

अगर आपकी कुंडली में नीचे दिए गए योग हैं, तो आपको शुरुआत में रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन भविष्य बेहद उज्ज्वल होता है:

  • मजबूत शनि का प्रभाव: शनि का स्वराशि (मकर, कुंभ) या उच्च राशि (तुला) में होना.
  • 10वें भाव पर राहु-शनि की दृष्टि: कर्म स्थान पर इन गंभीर ग्रहों का प्रभाव होना.
  • शुरुआती कठिन दशाएं: जीवन के पहले और दूसरे दशक में राहु, केतु या शनि की दशा का आना.
  • विपरीत राजयोग: विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अचानक बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचना.
  • कमजोर चंद्रमा लेकिन मजबूत कर्म भाव: मन भले ही थोड़ा अशांत रहे, लेकिन व्यक्ति कर्म करना कभी नहीं छोड़ता.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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