- लखेंद्र पासवान ने चिराग-सुमन पर लगाया परिवारवाद का आरोप
- संतोष सुमन ने की आरक्षण पर समीक्षा की मांग
- चिराग पासवान ने आरक्षण समीक्षा का किया विरोध
बिहार में आरक्षण पर एनडीए में जबरदस्त तकरार देखने को मिल रही है. बीजेपी कोटे के मंत्री लखेंद्र पासवान ने चिराग पासवान (LJPR), हिदुस्तानी आवाम मोर्चा के संतोष सुमन और उनके पिता जीतन मांझी पर निशाना साध दिया है. लखेंद्र पासवान ने पूछा, “आप लोगों ने अपने परिवार के अलावा कितने लोगों को आगे बढ़ाया है?”
बता दें कि एनडीए में चिराग पासवान व संतोष सुमन के बीच जुबानी जंग तेज हो चली है, इसी बीच बीजेपी कोटे के मंत्री ने लखेंद्र पासवान भी कूद गए हैं. उन्होंने चिराग पासवान और संतोष सुमन दोनों पर जमकर हमला बोला है. लखेंद्र पासवान ने चिराग, संतोष सुमन और जीतन मांझी को परिवार के दायरे से बाहर निकलकर अपने समाज के दूसरे लोगों को आगे बढ़ाने की नसीहत दी है.
लखेंद्र पासवान ने कहा कि मैं खुद पर भी यह लागू कर रहा और इसका ध्यान रखता हूं. लखेंद्र ने आगे कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, आरक्षण की समीक्षा या इसे छूना तो दूर, कोई इससे छेड़छाड़ भी नहीं कर सकता.
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संतोष सुमन ने आरक्षण पर की समीक्षा की मांग
बता दें कि HAM अध्यक्ष व बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए. उनका कहना है कि समीक्षा का मतलब इसे खत्म करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इसका लाभ सबसे कमजोर और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों तक पहुंचे, जो अब तक इसका पूरा लाभ नहीं उठा सके हैं.
संतोष सुमन ने आगे यह भी कहा कि हम SC-ST उप-वर्गीकरण के पक्ष में हैं. हम सिर्फ SC-ST कोटे की समीक्षा की मांग कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि कोटे का लाभ हमारे बीच सबसे कम सुविधा प्राप्त लोगों तक पहुंचे.
समीक्षा की मांग पर चिराग पासवान ने किया विरोध
एलजेपीआर चीफ व सह केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने समीक्षा की मांग का विरोध किया. चिराग ने कहा की आरक्षण की समीक्षा की बात करने वाले लोग देश से आरक्षण समाप्त करना चाहते हैं. आरक्षण के अंदर आरक्षण की बात करना भी गलत है. जो लोग आरक्षण में आरक्षण की बात कर रहे हैं उनको यह देखना चाहिए कि आज भी देश में जितनी अनुसूचित जाति, जनजाति की संख्या है, उनको आरक्षण का लाभ पूरी तरह मिल पा रहा है क्या?
चिराग ने यह भी कहा, “कितनी संस्थाएं हैं जिसमें इन समाज के लोगों को प्रमोशन में आगे बढ़ने के मौका नहीं मिल पा रहा है. आज भी इन समाज के लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है. ‘रिजर्वेशन विद इन रिजर्वेशन’ आ गया तो इस समाज की ताकत कम हो जाएगी.”
बता दें 2024 के अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक अहम फैसले में राज्यों को SC-ST के उप-वर्गीकरण की अनुमति दी थी. इसका उद्देश्य इन समूहों के भीतर उन अधिक पिछड़े समुदायों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाना है, जो अपेक्षाकृत अधिक वंचित रहे हैं.
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