हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर RJD सांसद मनोज कुमार झा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने भागवत के अमेरिका में दिए गए बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह ‘दिव्य ज्ञान’ उन्हें अमेरिका के मेडिसन स्क्वायर में मिला है तो इसे भारत भी लाना चाहिए, क्योंकि देश को इसकी जरूरत है.
मनोज झा ने कहा कि यह विरोधाभासी है कि हिंदू-मुस्लिम एकता की बात अमेरिका की धरती पर कही जा रही है, जबकि भारत में सत्ता से जुड़े कुछ नेताओं और मुख्यमंत्रियों के बयानों में लगातार हिंदू-मुसलमान का मुद्दा दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि RSS प्रमुख को यह भी देखना चाहिए कि केंद्रीय कैबिनेट के मंत्री और कुछ मुख्यमंत्री किस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं.
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‘अमेरिका से मिला ज्ञान भारत भी लाइए’
मनोज झा ने कहा, “ये बोलने के लिए उनको अमेरिका जाना पड़ा. ये कितना विरोधाभासी है.” उन्होंने सवाल किया कि क्या मोहन भागवत को देश में हो रही घटनाओं की जानकारी नहीं है. RJD सांसद ने कहा कि कुछ मुख्यमंत्रियों के दिन की शुरुआत ही हिंदू-मुसलमान के मुद्दे के बिना नहीं होती. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर मेडिसन स्क्वायर पर इस ‘दिव्य ज्ञान’ की प्राप्ति हुई है तो उसे भारत भी लाया जाना चाहिए.
‘भारत में कुछ और, अमेरिका में कुछ और नहीं चलेगा’
मनोज झा ने कहा कि देश में एक तरह की और अमेरिका में दूसरी तरह की बात नहीं होनी चाहिए. उनके मुताबिक, भारत को ऐसी राजनीति की जरूरत है जिसमें सभी समुदायों के बीच एकता और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता दी जाए. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि हिंदुस्तान की धरती पर एक बात कही जाए और अमेरिका की धरती पर सुविधा के अनुसार दूसरी बात कही जाए.
चिराग-मांझी विवाद पर भी साधा निशाना
मनोज झा ने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण के मुद्दे पर चल रहे विवाद को लेकर भी NDA पर सवाल उठाए. दोनों नेताओं के बीच अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण यानी ‘कोटे के अंदर कोटा’ और क्रीमी लेयर को लेकर मतभेद सामने आए हैं. चिराग पासवान ने उप-श्रेणी को समाज को बांटने वाला कदम बताया है, जबकि जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन इसका समर्थन कर रहे हैं. इसी विवाद में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के इस्तीफे की बात भी सामने आई है.
‘जनता के मुद्दों पर कोई इस्तीफा नहीं देगा’
मनोज झा ने दोनों नेताओं के इस्तीफे वाले बयान पर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी में से कोई भी जनता के मुद्दों पर इस्तीफा देने वाला नहीं है. RJD सांसद इससे पहले भी आरक्षण, सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष से स्पष्ट रुख की मांग करते रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि आरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे संवेदनशील मुद्दों पर NDA के नेता आपस में बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि वास्तविक नीतिगत सवालों पर स्पष्टता नहीं है.
मनोज झा ने कहा कि सत्ता में बैठे दलों और नेताओं को आरक्षण तथा सामाजिक न्याय के मुद्दों पर स्पष्ट और पारदर्शी रुख रखना चाहिए. चिराग-मांझी विवाद के बीच उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय और आरक्षण की बहस को और तेज कर दिया है.
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