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उमर खालिद और शरजील इमाम को मिलेगी राहत? अब CJI के पास पहुंचा मामला, जमानत पर फिर होगा विचार


बेल नियम है और जेल अपवाद… यह कहते हुए 18 मई को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने दूसरी बेंच के उस फैसले पर सवाल उठाए थे, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट पुराने आदेश की वैधता पर विचार करने के लिए यह मामला बड़ी बेंच के पास भेजने जा रहा है. कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kany) को मामला भेजकर उचित बेंच गठित करने को कहा है. उमर खालिद और शरजील इमाम साल 2020 के दिल्ली दंगों में आरोपी हैं और उन पर यूएपीए के आरोप लगे हैं.

5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने दिल्ली दंगों के पांच आरोपियों को जमानत दे दी थी, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि उन पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं इसलिए उनकी ये दलील पर्याप्त नहीं है कि वे लंबे समय से कोर्ट में बंद हैं. दोनों आरोपी पांच साल से भी ज्यादा समय से कोर्ट में बंद हैं.

18 मई को जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने हंदवाड़ा नार्को-टेरर केस के आरोपी जम्मू कश्मीर के सैयद इफ्तेखार अंद्राबी को जमानत दे दी थी. कोर्ट ने उस वक्त कहा था कि अंद्राबी को ‘के ए नजीब’ मामले में तीन जजों के फैसले के आधार पर जमानत दी जा रही है, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में इस न्यायिक सिद्धांत की अनदेखी हुई है.

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2021 के के ए नजीब फैसले में तीन जजों की बेंच ने मुकदमे में देरी को जमानत का मजबूत आधार माना था. कोर्ट ने कहा था कि यहां तक की यूएपीए जैसे मामलों में भी यह नियम लागू होगा. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार (22 मई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के दो और आरोपियों अब्दुल खालिद सैफी और तस्लीम अहमद को छह महीने की अंतरिम जमानत दी गई. इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इस कानूनी प्रश्न को बड़ी बेंच के समक्ष रखे कि मुकदमे से पहले लंबी अवधि की कैद और कार्यवाही को जमानत के लिए क्या यूएपीए जैसे मामलों में सख्त शर्तों पर प्राथमिकता दी जा सकती है. 

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत से इनकार इसलिए नहीं किया गया क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 21 को कम महत्व दिया गया, बल्कि उनके रोल और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया था. हालांकि, कोर्ट ने हालिया फैसलों में की गई टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. उन्होंने कहा कि मामले में कानूनी पहलुओं को व्यापक स्तर पर देखने की जरूरत है. कोर्ट ने मामले को देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के पास भेजते हुए उचित बड़ी बेंच गठित करने को कहा है.

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