टीवी रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का सीजन 18 किसी ना किसी वजह से चर्चा में रहता है. शो में एक्सर कोई किस्सा या कहानियां अमिताभ बच्चन शेयर करते रहते हैं. कई बार कंटेस्टेंट्स भी अपनी इमोशनल कहानी शेयर करते हैं और बिग बी को इमोशनल कर देते हैं. लेकिन हालिया एपिसोड में कुछ और देखने के लिए मिला. बिग बी ने अजमल कसाब के उस दावे पर गुस्सा जाहिर किया जब उसने कोर्ट में कहा था कि वो उनसे मिलने के लिए आया था.
दरअसल, ‘केबीसी 18’ के नए एपिसोड में ‘परहार’ की स्टारकास्ट राजकुमार राव और वामिका गब्बी पहुंचे. उनके साथ अजमल कसाब को फांसी दिलाने वाले वकील उज्जवल निकम भी थे. इस दौरान बिग बी ने इनसे 26/11 आतंकी हमले की घटना के बारे में बात की और इसी बातचीत में उज्जवल निकम ने बताया कि कैसे बचने के लिए शुरुआत में कसाब ने अमिताभ बच्चन का नाम लिया कि वो उनसे मिलने के लिए आया था क्योंकि वो उनका फैन था.
अजमल कसाब की फांसी में 4 साल क्यों लगे?
शो में अमिताभ बच्चन ने पूछा अजमल कसाब को फांसी में 4 साल क्यों लगा? बिग बी ने कहा, ‘उसे तो वहीं गाड़ देना चाहिए था. इतना वक्त क्यों लगा?’ तो इस पर उज्जवल निकम ने कहा, ‘ये जो हमारे देश का संविधान, डॉ. बाबा साहब अंबेडकर ने लिखा है. वो आज पूरे विश्व में सर्वश्रेष्ठ है. ये इसलिए बता रहा हूं कि जब ये अजमल आमिर कसाब पकड़ा गया और जब कोर्ट के सामने पेश किया गया. मेरी एक स्ट्रैटजी है कि किसी भी इंसान को पकड़ा गया है पहले उसे देखता हूं, उसकी बॉडी लेंग्वेज, बात करने का तरीका देखता हूं तो मैं उसकी साइकोलॉजी को समझने की कोशिश करता हूं.’
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उज्जव आगे बताते हैं, ‘अजमल कसाब जब कोर्ट में आया तो वो मुझे घूर के देख रहा था, मैं उसे देख रहा था. वो मुझे पहचानने की कोशिश कर रहा था. उसने कोर्ट में हथकंडों का इस्तेमाल किया. फांसी तो उसे मिलना जरूरी था लेकिन कानून के माध्यम से. लोगों की अपेक्षा थी. रूल ऑफ लॉ हमारे देश में सबसे सर्वश्रेष्ठ है. पहले कसाब जब आया कोर्ट में तो उसने कहा कि सर मैं 26/11 को नहीं पकड़ा गया. मुझे 6 नवंबर को जुहू चौपाटी में पकड़ा गया.’
अमिताभ बच्चन बोले- गोली मार देता…
उज्जवल निकम ने बताया, ‘आपको ताज्जुब होगा, जो आगे उसने कहा था कि मैं तो अमिताभ जी को देखने के लिए आया था. ये सच में हुआ है.’ इस पर बिग बी ने फट से रिएक्शन दिया और गुस्से में कहा, ‘नहीं-नहीं, सर अगर वो आया होगा तो वो हमार घर से जाने वाला नहीं था. वहीं हम गोली मार देते उसे.’ उज्जवल बताते हैं, ‘वो बहुत झूठा था और कहा कि रॉ ने उसे पकड़ा था. मैं नाबालिग हूं. मेरे खिलाफ केस चला नहीं सकते. अब ऐज प्रूव कहां से लाएं. पाकिस्तान सपोर्ट नहीं करने वाला था. कोर्ट में मैंने अलकायदा की लिस्ट दिखाया था कि किस तरीके से इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर्स को कैसे गुमराह करना? कोर्ट में क्या हथकंडे अपनाना.’
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उज्जवल कहते हैं, ‘हमारे कानून की यही खासियत है कि जब तक कि जुर्म साबित ना हो जाए उसे इनोसेंट माना जाए और हर अपराधी के पास खुद को इनोसेंट साबित करने के लिए भी राइट्स है. इसलिए टाइम लगा. वो फायरिंग प्रैक्टिस में स्टूडेंट नंबर फर्स्ट था. बाद में उसने कोर्ट को गुमराह करने के लिए ये भी कहा कि मेरे साथी स्माइल ने मारा मैंने कुछ नहीं किया. जब सीसीटीवी फुटेज दिखाया, जिसमें छोटी बच्ची को गोली मारी तो वो हंस रहा था. हमने कोर्ट में ये दलील पेश की. पाकिस्तान भी इस पर सवाल नहीं उठा पाया और ये हमारे कानून की जीत थी. उसके बचाव के लिए दो वकील मिले थे और हम सरकार की ओर से अकेले थे.’
