केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बीजेपी शासित राज्यों में 2029 तक यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने पर मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ एसटी हसन ने कहा कि वे कुरान की रोशनी में बताए गए प्रावधानों को मानेंगे. एसटी हसन ने कहा कि हम शरियत की मांग करेंगे और कुरान में जो हुक्म दिया गया है, हम उसी पर चलेंगे.
पूर्व सांसद ने आगे कि अपने परिवार और बेटियों को कितना देना है, यह तय करने का अधिकार उन्हें होना चाहिए. उन्होंने इसे माहौल खराब करने वाली राजनीति बताया. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोग यही कर सकते हैं, इन्हें न महंगाई पर कुछ करना है, न बेरोजगारी पर और न किसानों और मध्यमवर्ग के लिए. इनके घटक दल ही तैयार नहीं हैं.
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मस्जिदों को निशाना बनाने का आरोप
डॉ एसटी हसन ने UCC को लेकर सहारनपुर और मुरादाबाद की मस्जिदों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि UCC के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. यह हर बार कुछ इसी तरह का लाते हैं जिससे हिन्दू-मुस्लिम में तनाव बढ़े. इससे पहले वंदेमातरम् को लेकर भी विवाद खड़ा किया गया.
उन्होंने अंतिम संस्कार की परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि कोई मुसलमान नहीं चाहेगा कि उसकी बॉडी को जलाया जाए और कोई हिंदू नहीं चाहेगा कि उसकी बॉडी को दफनाया जाए.
इमरान मसूद पर निशाना
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयानों को लेकर भी एसटी हसन ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इमरान मसूद की सपा नेताओं से कुछ व्यक्तिगत समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह गठबंधन को लेकर टिपणी करें. एसटी हसन ने कहा कि न तो वह और न ही कोई ‘छुटभैया नेता’ यह तय करेगा कि गठबंधन रहेगा या नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान मसूद के इस तरह के बयानों से भाजपा को फायदा होता है.
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