आज हम एक ऐसी खबर की गहराई में जा रहे हैं जो पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा सवाल बन गई है. सऊदी अरब ने दावा किया है कि यमन के हूती विद्रोहियों ने इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का पर ड्रोन से हमला करने की कोशिश की. लेकिन हूतियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है और इसे एक ‘झूठ’ करार दिया है. आखिर सच क्या है और क्या सऊदी अरब ने खुद ही यह साजिश रची है…
सऊदी अरब का दावा: मक्का पर हमले की कोशिश
16 सितंबर 2026 को सऊदी अरब की सेना का कहना है कि उनके एयर डिफेंस सिसट्म ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को मार गिराया है. सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, यह ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में घुसने ही वाला था कि उसे इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया. अल-मलिकी ने साफ कहा कि मक्का और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उनके लिए ‘रेड लाइन’ है और इस पर किसी भी तरह के दुश्मन की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सऊदी अरब का यह भी कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की है. इससे पहले जुलाई 2017 में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई थी. हालांकि, इस बार का मामला इसलिए अलग है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से हूतियों ने सऊदी अरब के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले तेज कर दिए हैं.
हूतियों का इनकार: ‘यह एक पुराना झूठ है’
हूती विद्रोहियों ने इन सब आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. हूती पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य हाजाम अल-असद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘मक्का को निशाना बनाने के दावे एक पुराना झूठ हैं जो पहले भी इस्तेमाल किए गए हैं और अब किसी को बेवकूफ नहीं बना सकते.’
مزاعم استهداف مكة المكرمة كذبةٌ ممجوجة استُهلكت سابقًا، ولم تعد تنطلي على أحد، يا أرامل جيفري إبستين!
قاتلوا قتال الرجال، إن كنتم رجالًا https://t.co/QlWJm431hT
— حزام الأسد (@hezamalasad) September 15, 2026
एक और हूती अधिकारी मोहम्मद अल-फराह ने हूती समर्थित समाचार एजेंसी सबा को बताया कि यह आरोप ‘पूरी तरह से झूठ’ है. हूतियों का कहना है कि उन्होंने मक्का या किसी भी पवित्र स्थल को कभी निशाना नहीं बनाया. उनका यह भी कहना है कि सऊदी अरब ऐसे झूठे आरोप लगाकर पूरे मुस्लिम समुदाय को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा है.
क्या सऊदी अरब ने खुद ही मक्का पर हमले का नाटक रचा है?
मीडिया रिपोर्ट्स, मौजूदा हालत और एक्सपर्ट्स की मिली-जुली राय है, जिससे सऊदी अरब के नाटक रचने के 3 बड़े तर्क मिलते हैं…
- पहला तर्क: सऊदी अरब इस वक्त बहुत मुश्किल में है. हूतियों ने पिछले कुछ दिनों में यमन के लाल सागर तट के बड़े हिस्से और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर कब्जा कर लिया है. इससे सऊदी अरब का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. सऊदी अरब को अपने तेल को बेचने के लिए अब लाल सागर के रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है और हूतियों ने वहां भी कब्जा कर लिया है. ऐसे में सऊदी अरब को एक बड़ी वजह चाहिए थी ताकि वह पूरी दुनिया के मुसलमानों का ध्यान अपनी तरफ खींच सके और हूतियों के खिलाफ बड़ा मोर्चा बना सके. मक्का पर हमले का दावा इसके लिए एक परफेक्ट कार्ड साबित हो सकता है.
- दूसरा तर्क: सऊदी अरब को अपने सहयोगियों से मदद नहीं मिल रही है. मक्का डिफेंस पैक्ट का हिस्सा पाकिस्तान ने यमन में सैनिक भेजने से साफ इनकार कर दिया है. अमेरिका ने भी हूतियों के खिलाफ सीधे हमले करने से मना कर दिया है. ऐसे में सऊदी अरब के पास कोई और रास्ता नहीं बचा था, इसलिए उसने मक्का पर हमले का दावा करके पूरे इस्लामी जगत को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश की.
- तीसरा तर्क: हूतियों ने खुद सऊदी अरब पर यह आरोप लगाया है कि वह ‘मक्का पर हमले के झूठे बहाने’ से मुसलमानों को भड़का कर अपने पक्ष में करना चाहता है. हूतियों का कहना है कि सऊदी अरब पहले भी ऐसे झूठे दावे कर चुका है और अब भी वही पुराना तरीका अपना रहा है.
पाकिस्तान में भारत के पूर्व हाई कमिश्नर रहे अजय बिसारिया सऊदी अरब के तर्क को तवज्जोह देते हैं. अजय बिसारिया ने कहा, ‘मक्का पर ड्रोन अटैक सच है. यह हमला बाहर से ही आया हुआ लगता है. हालांकि, कुछ टेक्निकल वजहें भी हो सकती हैं, लेकिन सऊदी अरब खुद ही ऐसी चाल नहीं चलेगा. हूतियों में आपस में बहुत से कॉन्फ्लिक्ट नजर आते हैं, जो इस अटैक के पीछे हो सकते हैं.’
हालांकि, अजय बिसारिया का यह भी कहना है कि जब तक सबूत नहीं मिलते तब तक यकीन से कुछ भी कहना मुश्किल है.
सऊदी अरब की मजबूरी: किसने दिया साथ, किसने किया इनकार
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब को अपने सबसे करीबी सहयोगियों से भी मदद नहीं मिल रही है. आइए देखते हैं किसने क्या कहा:
- पाकिस्तान का कहना है कि उसकी सेना सऊदी अरब की धरती की रक्षा कर सकती है, लेकिन किसी और देश की जंग में हिस्सा नहीं लेगी.
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब की मदद करने से इनकार कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की मदद की गुजारिश को ठुकरा दिया है.
- सबसे हैरानी की बात यह है कि सऊदी अरब ने इजरायल से मदद मांगी है. इजरायली अखबार ‘इजरायल हयोम’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के जरिए इजरायल से खुफिया जानकारी मांगी है. यह बहुत बड़ी बात है क्योंकि सऊदी अरब इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता और दोनों के बीच कोई राजनयिक संबंध भी नहीं हैं.
- सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी से मुलाकात की है. मिस्र ने सऊदी अरब के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया है, लेकिन यह साफ नहीं है कि वह सेना भेजेगा या नहीं.
मक्का पर हमला क्यों है इतना बड़ा मुद्दा?
मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और यहां हर साल लाखों मुसलमान हज और उमरा के लिए आते हैं. अगर यहां किसी भी तरह का हमला होता है, तो पूरी दुनिया के मुसलमानों की भावनाएं भड़क सकती हैं. यही वजह है कि सऊदी अरब ने मक्का पर हमले के दावे को इतना बड़ा बना दिया है. सऊदी अरब का कहना है कि मक्का की सुरक्षा उसके लिए सबसे ऊपर है और वह इसे किसी भी कीमत पर खतरे में नहीं डाल सकता.
सवाल यह है कि अगर हूतियों ने सच में मक्का पर हमला नहीं किया, तो सऊदी अरब ऐसा झूठ क्यों बोलेगा? इसका जवाब शायद सऊदी अरब की मजबूरी में छिपा है.
सऊदी अरब इस वक्त चारों तरफ से घिरा हुआ है. उसकी अर्थव्यवस्था तेल निर्यात पर निर्भर है और हूतियों ने उसके तेल के रास्तों को बंद कर दिया है. ऐसे में उसे एक ऐसा मुद्दा चाहिए था जो पूरी दुनिया का ध्यान उसकी तरफ खींच सके. मक्का पर हमले का दावा उसके लिए एक ऐसा ही मुद्दा बन गया.
