गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) बनाने को कहा है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी से कहा है कि वह तीन महिला आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी बनाएं. एसआईटी 2 सप्ताह में रिपोर्ट दे. उसकी रिपोर्ट आने तक ट्रायल कोर्ट अपनी कार्रवाई स्थगित रखे.
घटना 16 मार्च की है. बच्ची को बहला-फुसलाकर आरोपी ले गया था. बाद में वह घर से 500 मीटर दूर झाड़ियों में बुरी तरह घायल स्थिति में मिली. 2 हस्पतालों में दाखिला न मिलने के बाद उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. घटना की जांच में पुलिस के लापरवाह रवैये की शिकायत करते हुए बच्ची के पिता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं. इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर और एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट तलब किया था.
शुक्रवार, 24 अप्रैल को गाजियाबाद पुलिस की तरफ से बताया गया कि मामले की जांच पूरी करने के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी गई है लेकिन पीड़िता के पिता ने पुलिस पर मनमुताबिक बयान देने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया. इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने आईजी रैंक की महिला अधिकारी के नेतृत्व में 3 महिला आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी बनाने को कह दिया.
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याचिका में 2 निजी अस्पतालों पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने बच्ची को भर्ती कर इलाज करने से मना कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस पहलू की भी जांच का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि शनिवार को सुबह 11 बजे तक एसआईटी का गठन कर दिया जाए. एसआईटी याचिकाकर्ता की तरफ से जताई गई सभी चिंताओं पर गौर करे और जांच करे. वह 2 सप्ताह में अपनी सप्लीमेंट्री रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट को दे. तब तक मुकदमे की कार्यवाही रुकी रहे.
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ध्यान रहे कि पुलिस ने शुरू में सिर्फ हत्या की एफआईआर दर्ज की थी. हालांकि, बाद में उसने रेप की बात भी एफआईआर में जोड़ी. घटना के अगले दिन आरोपी गिरफ्तार हो गया था. उसने पुलिस को दिए बयान में रेप और हत्या की बात स्वीकार की है लेकिन पीड़ित परिवार पुलिस के रवैए से असंतुष्ट है. वह बच्ची का इलाज न करने वाले हस्पतालों को बचाए जाने का भी आरोप लगा रहा है.
