GaN का पूरा नाम Gallium Nitride यानी गैलियम नाइट्राइड है. यह एक सेमीकंडक्टर मटेरियल है, जिसका इस्तेमाल पहले से LED और रडार सिस्टम जैसी तकनीकों में होता रहा है. अब इसका यूज चार्जर बनाने में भी किया जा रहा है. पारंपरिक चार्जर में आमतौर पर सिलिकॉन आधारित कंपोनेंट इस्तेमाल होते हैं, जबकि GaN चार्जर में उनकी जगह गैलियम नाइट्राइड के कंपोनेंट लगाए जाते हैं.

GaN कंपोनेंट बिजली को तेजी से स्विच कर सकते हैं और ज्यादा वोल्टेज संभाल सकते हैं. इससे चार्जर के अंदर इस्तेमाल होने वाले ट्रांसफॉर्मर और दूसरे कंपोनेंट का आकार कम किया जा सकता है. यही वजह है कि GaN चार्जर कम जगह में ज्यादा पावर देने के लिए डिजाइन किए जा सकते हैं.

GaN चार्जर USB Power Delivery (PD) और Qualcomm Quick Charge जैसे फास्ट चार्जिंग प्रोटोकॉल को सपोर्ट कर सकते हैं, हालांकि चार्जिंग की असली स्पीड डिवाइस की क्षमता और चार्जर के सपोर्ट पर निर्भर करती है. सही कॉम्बिनेशन होने पर फोन, टैबलेट या लैपटॉप को कम समय में चार्ज किया जा सकता है.

चार्जर सॉकेट से मिलने वाली AC बिजली को डिवाइस के इस्तेमाल लायक DC बिजली में बदलता है. इस प्रक्रिया में कुछ एनर्जी गर्मी के रूप में बर्बाद होती है. GaN तकनीक इस नुकसान को कम करने में मदद करती है. इससे चार्जर पारंपरिक सिलिकॉन आधारित मॉडल की तुलना में कम गर्म हो सकता है और एनर्जी का इस्तेमाल ज्यादा एफिशिएंसी से कर सकता है.

कई GaN चार्जर में एक से ज्यादा USB पोर्ट दिए जाते हैं. ऐसे मॉडल से स्मार्टफोन, टैबलेट और USB-C चार्जिंग सपोर्ट करने वाले लैपटॉप को एक साथ चार्ज किया जा सकता है, हालांकि एक साथ कई डिवाइस जोड़ने पर उपलब्ध पावर अलग-अलग पोर्ट में बंट सकती है. इसलिए चार्जर की कुल वॉट क्षमता और पोर्ट की पावर डिस्ट्रीब्यूशन देखना जरूरी है.

चार्जर खरीदने से पहले अपने डिवाइस की पावर जरूरत चेक करें. स्मार्टफोन के लिए 18W-45W और लैपटॉप के लिए 65W-100W के चार्जर यूजफुल हो सकते हैं, लेकिन सही क्षमता डिवाइस के मॉडल पर निर्भर करेगी. इसके अलावा USB PD या Quick Charge जैसे जरूरी प्रोटोकॉल, पोर्ट की संख्या और सुरक्षा सर्टिफिकेशन भी चेक करें.
Published at : 20 Oct 2026 09:36 PM (IST)
