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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में नहीं होगा SSR, अगले साल से शुरू हो सकता है SIR


केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में इस साल वोटर लिस्ट का ‘स्पेशल समरी रिविजन’ (SSR) नहीं होगा. अगले साल जनगणना पूरी होने के बाद इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) की प्रक्रिया शुरू होगी. आम तौर पर यह 1 सितंबर से 31 दिसंबर के बीच होता है. 

सूत्रों की माने तो जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में यह प्रक्रिया सर्दियों के मौसम के बाद होने की संभावना है. ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में सर्दियां आम तौर पर नवंबर में शुरू होती हैं और मार्च तक रहती हैं. इसके बाद का मौसम इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अनुकूल होता है. 

स्पेशल इलेक्टोरल रोल रिवीजन की प्रक्रिया के चलते नहीं होगा SSR

भारत निर्वाचन आयोग ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है और कुछ अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभी चल रही है. देश भर में इस प्रक्रिया के तीसरे चरण के पूरा होने के साथ ही, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दोनों केंद्र शासित प्रदेशों और पड़ोसी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश को छोड़कर पूरे देश में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ का काम पूरा हो जाएगा. 

सूत्रों की माने तो स्पेशल इलेक्टोरल रोल रिवीजन की आने वाली प्रक्रिया को देखते हुए, 1 सितंबर से जम्मू कश्मीर और लद्दाख में SSR यानि समरी इलेक्टोरल रोल रिवीजन नहीं होगा. उम्मीद है कि इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में रिवीजन का काम मार्च से हिमाचल प्रदेश के साथ ही शुरू किया जाएगा, जब जनगणना पूरी हो जाएगी और मौसम ठीक होगा.’ जम्मू कश्मीर में साल 2025 में भी स्पेशल समरी रिवीजन नहीं हुआ था. साल 2024 में, विधानसभा चुनाव से पहले समरी रिविजन किया गया था और चुनाव सितंबर-अक्टूबर 2024 में हुए थे.

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रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों के चलते अहम हो जाती है SIR की प्रक्रिया

राजनीतिक जानकार मानते है कि जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की मौजूदगी को लेकर चिंताओं के बीच SIR प्रक्रिया अहम हो जाती है. कुछ दिन पहले, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा डेमोग्राफिक बदलावों पर बनाई गई हाई-लेवल कमेटी ने इस इलाके में अवैध प्रवासियों की मौजूदगी का अध्ययन करने के लिए तीन दिन तक जम्मू का दौरा किया था. वहीं कुछ अवैध प्रवासियों ने हेरफेर करके वोटर कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज हासिल कर लिए होंगे और उनमें से कई लोगों ने खुद को वोटर के तौर पर रजिस्टर भी करवा लिया होगा.

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