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जस्टिस भुइयां के बयान से विपक्ष को मिला नया हथियार, कहा- ‘CEC हुए एक्सपोज’ | बड़ी बातें


सीईसी और चुनाव आयोग पर हुए एसआईआर को लेकर खुलासे के बाद से देश की सियासी राजनीति गरमाई हुई है. इधर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां के बयान ने विपक्ष को नया हथियार दे दिया है. जस्टिस भुइयां ने कहा है कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया, जिसके तहत व्यापक पैमाने पर भारतीय नागरिकों को उनके वोट करने के अधिकार से दूर करती है, वो प्रक्रिया मनमानी है. 

जस्टिस भुइयां के इस बयान को विपक्ष ने हाथों हाथ लिया. टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए उनकी तारीफ करते हुए एक्स पर कहा कि रिटायरमेंट के दिन जज का हिम्मत दिखाना आसान होता है. लेकिन जब कोई मौजूदा जज सत्ता के सामने सच बोलता है, तो यह एक मिसाल होती है. जस्टिस भुइयां की तारीफ होनी चाहिए. 

वहीं कांग्रेस ने जस्टिस भुइयां की बातों का जिक्र करते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणियां साफ तौर पर साबित करती हैं कि सीईसी ने संविधान की अक्षरश: और उसकी मूल भावना दोनों का उल्लंघन किया है. जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ने ज्ञानेश कुमार की पूरी पोल खोल दी है. अब उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. जयराम रमेश ने इससे जुड़ा एक पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर किया है.  

इधर, एसआईआर को रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन का दौर है. दिल्ली में सीजेपी का प्रोटेस्ट जारी है, तो वहीं शिवेसना यूबीटी प्रमुख ने भी रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया. इसके अलावा छात्र संगठन AISA के नेतृत्व में नेहा बोरा भी मैदान में नजर आईं. 

उद्धव ठाकरे- राज ठाकरे ने मुंबई में खोला CEC के खिलाफ मोर्चा
मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपने नेतृत्व में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रविवार को एक विरोध मार्च ‘गर्जना मोर्चा’ निकाला. हालांकि मुंबई पुलिस ने इस मार्च के आयोजक के खिलाफ केस दर्ज किया है. मुंबई पुलिस इस पूरे मामले पर कहा है कि रविवार को गर्जना मोर्चा बिना इजाजत के निकाला गया. इसके बाद यह मामला दर्ज किया गया. 

यह मार्च मुंबई में मेट्रो सिनेमा से बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) हेडक्वार्टर तक निकाला गया. इस संयुक्त मार्च में सीईसी और ईसीआई पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया गया. मार्च में कम्युनिस्ट पार्टियों, किसानों और वर्कर्स पार्टी ने हिस्सा लिया. इस दौरान एसआईआर प्रक्रिया खत्म करने और ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की गई. 

इस दौरान राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई में धूप की वजह से माहौल गर्म है, लेकिन देश में वोट चोरी के मुद्दे पर भी माहौल गर्म है. उन्होंने कहा कि 2017 से ही चुनाव में गड़बड़ी की आशंका था. उस समय उन्होंने सोनिया गांधी और ममता बनर्जी से मुलाकात की थी, उनका कहना था कि वोट इस तरह कम नहीं हो सकते, चुनाव में गड़बड़ी का सवाल उठता है. 

राज ठाकरे ने कहा, ‘अब यह बात सबके सामने आई है. हमें आपके खिलाफ यह गुस्सा नहीं है. आप सत्ता पर कैसे बैठे हैं. सत्ता कैसे चला रहे हैं. यह इसका गुस्सा है. महाराष्ट्र में एसआईआर रद्द होना चाहिए. चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए जाने चाहिए.’ 

वहीं, उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर मेरे मन में सवाल है. चुनाव आयोग की नियुक्ति चुनाव के जरिए होनी चाहिए. पहले एक समिति हुआ करती थी. इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते थे. 

उद्धव ने कहा, ‘उन्होंने (केंद्र सरकार ने) इस समिति से मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया. मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए एक मंत्री को समिति में शामिल किया गया. वह मंत्री अमित शाह हैं. अदालतों में लगातार सुनवाई होती रहती है, लेकिन कोई जवाबदेही नहीं है.’

सीजेपी ने संसद मार्ग थाने पर किया प्रदर्शन
इधर, दिल्ली में सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास की अगुवाई में भी दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर सीजेपी ने प्रदर्शन किया. थाने के बाहर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जुटी रही. दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की गई. प्रदर्शनकारी शनिवार को कथित तौर पर महिला पत्रकार के साथ हुई बदसलूकी को लेकर विरोध प्रदर्शन करने जुटे थे. तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. इधर, पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शिकायतों को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया है. 

इधर, सीजेपी ने कहा है कि हमारी टीम पीड़ित के साथ पुलिस  स्टेशन गई थी. एसीपी विवेक भगत के खिलाफ छेड़छाड़ की एफआईआर दर्ज करने को कहा लेकिन दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच की जांच का हवाला देते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया. सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर आरोपी को बचाने की कोशिश करार दिया.  

AISA का प्रदर्शन, नेहा रिहाई के बाद बोलीं- हमारा अधिकार है

वहीं, AISA की तरफ से प्रोटेस्ट की अगुवाई कर रहीं नेहा बोरा, योगेंद्र यादव समेत कई प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने डिटेन कर लिया. इस दौरान आइसा ने आरोप लगाया कि बिना महिला पुलिस के नेहा बोरा को डिटेन कर पुलिस अज्ञात जगह पर ले गई. वहीं, कुछ देर बाद जानकारी सामने आई कि AISA की अध्यक्ष बोरा को दिल्ली पुलिस ने नरेला इंडस्ट्रीयल एरिया पुलिस स्टेशन से रिहा कर दिया है. उनका फोन और बैग उनके पास नहीं है. हम उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए वकीलों की एक टीम पुलिस स्टेशन भेज रहे हैं. 

इसके कुछ देर बाद नेहा बोरा ने एक वीडियो जारी करते हुए बताया कि 8 बजकर 13 मिनट हो गए हैं. नरेला इंडस्ट्रीयल पुलिस स्टेशन से हमें रिहा किया गया है. इन्हें लगता है कि हम कुत्ते हैं, हम कॉकरोच हैं. इन्हें मारो, कहीं भी उठाकर फेंक दो. गाड़ी में घुसेड़कर के पचास किमी दूर डिटेन कर लो, लेकिन आज इन्हें दिखाया कि हम कुत्ते नहीं हैं, कॉकरोच नहीं हैं, कीड़े मकोड़े नहीं हैं. इस देश के नागरिक हैं. इस देश के लोगों को अधिकार है कि सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछो, जो वोट वो दे रहे हैं, उसका सौदा करती है क्या ईसीआई और देश की रूलिंग पार्टी, ये पूछना भी हमारा अधिकार है. इसके अलावा डेस्गिनेटेड साइट्स पर प्रोटेस्ट करने से रोका जाता है तो उस पर हमारी दावेदारी करना ये भी हमारा अधिकार है. 

जस्टिस भुइयां ने क्या कहा है? 

जस्टिस भुइयां ने हैदराबाद के NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी में वोटर लिस्ट को लेकर इशारों ही इशारों में बयान दिया है. उन्होंने कहा है,  ‘लाखों भारतीय नागरिकों से उनके मतदान करने के अधिकार से छीनने वाली प्रक्रिया को किसी भी तरह के दलीलों के जरिए सही नहीं ठहराया जा सकता है. यह संविधान के मूल ढांचे पर हमला करती है और मैं यहां तक कहूंगा कि यह उस संवैधानिक व्यवस्था में निषेध है, जिसे हमने भारत के संविधान के तहत अपनाया है.’

उन्होंने कहा, ‘किसी मृत मतदाता के मामले को छोड़कर, एक बार जब वोटर लिस्ट में किसी मतदाता का नाम दर्ज कर दिया जाता है, तो उसके बाद उसे बिना नोटिस और सुनवाई का मौका दिए उसका नाम वोटर लिस्ट से हटाया नहीं जा सकता है.’



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