जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल से सामने आए एक गंभीर मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. अस्पताल की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से माना है कि ऑर्थोपेडिक यूनिट के डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई.
मामला वृद्ध महिला धापू देवी से जुड़ा है, जिनके लेफ्ट पैर का ऑपरेशन किया जाना था, लेकिन चौंकाने वाली गलती में डॉक्टरों ने उनके पूरी तरह स्वस्थ राइट पैर की सर्जरी कर दी. इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल जांच के आदेश दिए गए.
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अस्पताल के अध्यक्ष ने दी यह जानकारी
एमडीएम अस्पताल के अध्यक्ष विकास राजपुरोहित ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच कमेटी का गठन किया गया था. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि की है. सेल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल बा जोधा को कमेटी की रिपोर्ट सुपुर्द कर दी गई है. इस मामले में शामिल डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को नोटिस जारी किए गए थे और अब रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
प्रोटोकॉल पर उठे सवाल
इस घटना ने अस्पतालों में अपनाए जाने वाले मेडिकल प्रोटोकॉल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सामान्यतः किसी भी सर्जरी से पहले मरीज की पहचान, ऑपरेशन साइट की पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाता है, ताकि ऐसी गंभीर गलतियों से बचा जा सके. बावजूद इसके, इतनी बड़ी चूक होना गंभीर चिंता का विषय है.
मरीज सुरक्षा पर संकट
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की त्रुटि नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों की ओर इशारा करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं मरीजों के भरोसे को कमजोर करती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर असर डालती हैं.
कार्रवाई पर टिकी नजरें
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं. यह घटना एक चेतावनी है कि चिकित्सा क्षेत्र में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यहां एक छोटी सी गलती भी किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है.
राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व स्वास्थ मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वास्थ्य को लेकर काफी गंभीर है और किसी भी तरह की लापरवाही होने पर सख्त कार्यवाही के निर्देश भी चुके है.
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