बंगाल पुलिस ने हनी ट्रैप से जुड़े एक मामले में खुलासा किया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नेताओं को हनी ट्रैप में फंसाने की साजिश रची गई थी. पुलिस ने झारखंड की एक महिला को अरेस्ट किया है. पुलिस की मानें तो यह जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध ऑपरेटिव हामिम मंडल से संपर्क में थी, जिसे 30 जुलाई को अरेस्ट किया गया था. महिला का नाम अर्पिता सरकार है. इस शुक्रवार को झारखंड के साहिबगंज से अरेस्ट किया गया और बंगाल के बर्धमान लाया गया है.
अधिकारियों ने शनिवार को जानकारी दी कि जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध ऑपरेटिव मोहम्मद हामिम मंडल को गुरुवार को बर्धमान शहर से अरेस्ट किया गया था. अर्पिता सरकार मंडल की करीबी साथी और गर्लफ्रेंड है. वह व्हाट्सएप के जरिए मंडल से संपर्क में थी. जांच के दौरान दोनों की बातचीत हुई थी. इससे जुड़ी चैट बरामद की गई है. एसटीएफ ने बर्धमान शहर के एक हाउसिंग कॉम्पलेक्स में मंडल को उसके किराए के अपार्टमेंट से अरेस्ट किया है. उसपर आईएसआई समर्थित नेटवर्क का हिस्सा होने का संदेह है. इसका काम बीजेपी नेताओं सहित वीआईपी लोगों के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा करना, ऑपरेटिव्स की भर्ती करना और राज्य में संभावित आतंकी गतिविधियों के लिए आधार तैयार करना था.
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी बोले- यह एक संवेदनशील मामला
बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने बताया, ‘यह एक संवेदनशील मामला है. एसटीएफ और सीनियर पुलिस अधिकारी इस मामले को देख रहे हैं. हो सकता है कि उसके इंटरनेशनल रिलेशन हों. पुलिस इसकी जांच कर रही है. शुरुआती जांच से पता चलता है कि मंडल मुख्यमंत्री अधिकारी की गतिविधियों और उनके काफिले के रास्तों पर नजर रख रहा था.’
बताया जा रहा है कि कथित तौर पर सरकार ने संदिग्ध मॉड्यूल की गतिविधियों के तहत लोगों को फंसाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हनी ट्रैप नेटवर्क में अहम भूमिका निभाई.
राजनीतिक हस्तियों की संवेदनशील जानकारी पाने नेटवर्क बनाने की कोशिश
पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि हमारी जांच से पता चलता है कि आरोपी ने कुछ राजनीतिक हस्तियों की संवेदनशील निजी जानकारी हासिल करने के लिए एक नेटवर्क बनाने की कोशिश की थी. कथित तौर पर उस महिला का इस्तेमाल संपर्क बनाने और जानकारी जुटाने के लिए किया गया था. इसके अलावा अधिकारी ने बताया कि डिजिटल सबूतों की पुष्टी कर रहे हैं. उसकी भूमिका की असलियत का पता लगा रहे हैं. साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या उसके द्वारा जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल हमलों की योजना बनाने के लिए किया जाना था.
