लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने चेतावनी दी है कि अगर गृह मंत्रालय (MHA) के साथ होने वाली सब-कमेटी की बैठक से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो वे बहुत बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे. बातचीत का अहम दौर 9 सितंबर को नई दिल्ली में होना है. क्षेत्रीय नेताओं ने बातचीत का स्वागत किया है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि उनके अगले कदम पूरी तरह से बातचीत के नतीजे पर निर्भर करेंगे.
दिल्ली में 9 सितंबर को गृह मंत्रालय (MHA) के साथ सब-कमेटी की बैठक से पहले लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी मुख्य मांगों पर ठोस प्रगति करने में नाकाम रहती है, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे. अगस्त 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश (UT) का दर्जा मिलने के बाद से लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) मिलकर इन मांगों को लेकर आंदोलन चला रहे हैं और 2021 से केंद्र के साथ बातचीत के कई दौर कर चुके हैं.
क्या बोले LAB के चेयरमैन
LAB के चेयरमैन शेरिंग दोरजे लाक्रुक ने कहा कि हालांकि उनका ग्रुप MHA के साथ बैठक का स्वागत करता है, लेकिन वे बातचीत का आकलन उसके नतीजे के आधार पर करेंगे. उन्होंने कहा, “अगर बैठक का नतीजा सकारात्मक रहता है और इन मुद्दों पर रचनात्मक और नतीजे देने वाली बातचीत होती है, तो हम उसका स्वागत करेंगे. वरना हम अपने आंदोलन को बहुत जोरदार तरीके से तेज करेंगे.”
लाक्रुक ने पिछले साल 24 सितंबर की घटनाओं की जांच के लिए बनाए गए जांच आयोग की रिपोर्ट में देरी पर भी निराशा जताई. इन घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई थी. उन्होंने लद्दाख के मामले में केंद्र पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली में 20 जुलाई की जंतर-मंतर घटना से जुड़े मामलों को वापस लेने की बात स्वीकार की.
80 में सिर्फ 25 मामले वापस
लाक्रुक के मुताबिक, पिछले साल हुई हिंसा से जुड़े 80 मामलों में से अब तक सिर्फ़ 25 मामले ही वापस लिए गए हैं. उन्होंने कहा, “हम सभी भारतीय हैं और सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए. लद्दाख के लोगों की जान इतनी सस्ती नहीं है.” उन्होंने आंदोलन में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों के लिए मुआवज़े की मांग की.
इस बीच सोनम वांगचुक ने कहा कि LAB पिछले साल मारे गए, घायल हुए और जेल गए लोगों की याद में सितंबर को शहीद माह के तौर पर मना रहा है. वांगचुक ने कहा कि कई कार्यक्रम तय किए गए थे, लेकिन कारगिल से लेह तक की प्रस्तावित पद यात्रा, जो 10 सितंबर को शुरू होने वाली थी, उसे MHA के साथ एक दिन पहले होने वाली बातचीत को देखते हुए टाल दिया गया है.
9 सितंबर को बैठक
वांगचुक ने कहा, “हमने मिलकर तय किया है कि पदयात्रा को फिलहाल टाल दिया जाए.” उन्होंने कहा कि अगर 9 सितंबर की बातचीत से कोई संतोषजनक नतीजा नहीं निकलता है, तो मार्च को फिर से शुरू किया जा सकता है. अगर ऐसी स्थिति बनती है, तो मार्च 24 सितंबर से लगभग पांच दिन पहले आयोजित किया जाएगा.
वांगचुक ने कहा, “हम एक बार फिर पूरे भारत के लोगों से अपील करेंगे कि वे लद्दाख के समर्थन में पर्यावरण के समर्थन में और देश की सीमाओं पर डटे लद्दाख के लोगों के समर्थन में आगे आएं.” उन्होंने कहा कि एपेक्स बॉडी को उम्मीद है कि सरकार 9 सितंबर की बैठक में प्रस्तावित लद्दाख विधानसभा पर एक विस्तृत ड्राफ्ट पेश करेगी, जिसमें उसकी शक्तियों और अधिकारों का ब्योरा होगा. उन्होंने कहा, “अगर इन मुद्दों पर कोई प्रगति होती है, तो हम बातचीत को सफल मानेंगे.”
वांगचुक ने कहा कि 24 सितंबर से जुड़े हालात सामान्य नहीं हैं और संकेत दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो LAB हिंसा और आगजनी की घटनाओं के बारे में अपनी जानकारी सार्वजनिक कर सकती है. विभिन्न राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक संगठनों का संयुक्त समूह लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए मिलकर लड़ रहा है.
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