अब धीरे-धीरे दुनिया इतनी आगे बढ़ गई है कि, अब गाड़ियों में बिना ड्राइवर के भी ड्राइव होना आम बात हो गया है. अभी हाल ही में लंदन के सड़कों पर बिना ड्राइवर के टैक्सी चली थी. जबकि अब यूरोप के प्रसिद्ध इटली स्थित इमोला सर्किट के रेसिंग ट्रैक पर बिना किसी इंसानी ड्राइवर के 5 हाई-स्पीड रेसिंग कारें एक साथ ट्रैक पर उतरीं. अबु धाबी ऑटोनामस रेसिंग लीग द्वारा आयोजित इस रेस ने दुनिया भर के ऑटो उत्साही लोगों को हैरान कर दिया है.
बता दें कि, ट्रैक पर इन एआई संचालित सुपरफॉर्मूला सुपरकारों ने न केवल 250 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की तूफानी रफ्तार हासिल की जबकि ओवरटेकिंग, कॉर्नरिंग और रियर-टाइम डिसीजन मेकिंग का शानदार प्रदर्शन भी पेश किया. इस पूरे आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि रेस के दौरान किसी भी कार में कोई ह्यूमन सेफ्टी ड्राइवर मौजूद नहीं था. सभी फैसले गाड़ियों में लगे सेंसर्स और एल्गोरिदम द्वारा लाइव लिए जा रहे थे. टेक्नोलॉजी के इस महाकुंभ ने साबित कर दिया है कि आने वाले समय में ड्राइवरलेस रेसिंग और ऑटोनामस वाहन हमारी सड़कों और रेस ट्रैक्स का नया भविष्य बनने वाले हैं.
252KM/H की रफ्तार और AI का कमाल
आपको बता दें कि, इस रेस में हिस्सा लेने वाली सभी 5 गाड़ियों को एक ही हार्डवेयर यानी EAV-25 सुपरफॉर्मूला चेसिस पर तैयार किया गया था. इन कारों में समान इंजन, 15 हाई-टेक सेंसर्स फिट किए गए थे.
वहीं, असली मुकाबला कारों की पावर में नहीं बल्कि टीमों द्वारा लिखे गए एआई सॉफ्टवेयर कोड में था. इटली की पोलीमूव टीम की एआई कार ने रेस के दौरान 252.3 किलोमीटर प्रति घंटे की रिकॉर्ड टॉप स्पीड हासिल की. एआई ने पूरी सटीकता के साथ शार्प मोड़ों पर कार की ग्रिप और स्पीड को कंट्रोल किया. जिसे देख सभी लोग हैरान रह गए.
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ट्रैक पर देखने को मिला रोमांच
हमेहा इंसानों की तरह ही एआई कारों से भी रेसिंग ट्रैक पर गलतियां हुईं. जिससे यह रेस बेहद थ्रिलर बन गई. रेस के दौरान पोल-पोजीशन पर चल रही यूनिमोर कार के एक सेंसर में अचानक तकनीकी खराबी आ गई जिससे सुरक्षा लॉजिक के तहत कार ट्रैक पर ही अचानक रुक गई.
महज एक सेकंड पीछे 250 किमी/घंटा की रफ्तार से आ रही पोलीमूव की एआई कार समय रहते खुद को बचा नहीं सकी और सीधे पीछे से टकरा गई. इस दुर्घटना के बाद यूएई की काइनेटिज टीम की कार ने बढ़त बनाकर रेस जीत ली.

सड़क सुरक्षा के लिए रखे गए थे नियम
जानकारी दें दे कि, इस ऐतिहासिक रेस ने वाहनों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल और नियम सामने रख दिए हैं. सार्वजनिक सड़कों पर जब कोई सेल्फ-ड्राइविंग या एआई कार हादसे का शिकार होती है तो इंसानी गलती न होने के कारण नो-फॉल्ट लायबिलिटी का नियम लागू होता है.
मोटर वाहन अधिनियम और इंटरनेशनल ट्रैफिक रेगुलेशन के तहत अगर टेक्निकल या एआई सेंसर विफलता के कारण दुर्घटना होती है तो थर्ड-पार्टी क्लेम और नुकसान की पूरी भरपाई एआई डेवलपर या वाहन निर्माता कंपनी के बीमा कवरेज से की जाती है.
क्यों है खास?
आपको बता दें कि, इमोला जैसे कठिन और घुमावदार ट्रैक पर बिना ड्राइवर के 12 लैप की रेस आयोजित करना एआई कितना आगे पहुंच चुका है यह दर्शाता है. इस परीक्षण से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल भविष्य में कमर्शियल सेल्फ-ड्राइविंग कारों को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए किया जाएगा.
जब एआई 250 किमी/घंटा की रफ्तार पर इमर्जेंसी ब्रेकिंग और कॉर्नरिंग सीख जाएगा तो सामान्य सड़कों पर होने वाले हादसों को लगभग शून्य किया जा सकेगा. यह रेस आने वाले दिनों में पैसेंजर कारों में मिलने वाले ADAS और ऑटो पायलट फीचर्स को पूरी तरह से बदलने वाली साबित होगी.
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