बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार मदरसों को लेकर सख्त दिखाई दे रही है. बिहार के मदरसों को लेकर जांच के आदेश जारी किए गए हैं. वैसे मदरसे जो राज्य सरकार से अनुदान ले रहे हैं उनकी जांच होनी है. इस बीच शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुए आदेश के बाद इस पर सियासत भी हो रही है.
‘माहौल बनाने की कोशिश न करे सरकार’
मंगलवार (02 जून, 2026) को आरजेडी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि मदरसों की जांच के नाम पर सरकार माहौल बनाने की कोशिश ना करे. उन्होंंने कहा कि यह देखना होगा कि जांच के नाम पर जो बुनियादी शिक्षा है वह प्रभावित न हो.
इस पूरे मामले में बीजेपी की ओर से भी बयान आया है. मदरसों की जांच पर बीजेपी के प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा, “शासन जानना चाहता है कि मदरसों के हाल क्या हैं, किन-किन चीजों की जरूरत है, क्या पढ़ाया जा रहा है, इसलिए मदरसों की जांच के आदेश दिए गए हैं. एनडीए सरकार हर तबके के नौनिहालों का उज्वल भविष्य सुनिश्चित करने की गारंटी देती है.”
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गुलाम रसूल बलियावी ने क्या कहा?
जांच के आदेश पर बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मौलाना गुलाम रसूल बलियावी का भी बयान आया है. उन्होंने कहा कि दो चीजें समझने की जरूरत है, सिर्फ मदरसा ही अनुदान पर नहीं चलता बल्कि एजुकेशन बोर्ड के तहत संस्कृत विद्यालय भी अनुदान पर चलता है. बहुत सारे स्कूल और कॉलेजे भी अनुदान पर चलते हैं.
उन्होंने कहा कि पहले सरकार जांच करती है तब अनुदान देती है चाहे मदरसा हो, संस्कृत कॉलेज या अन्य स्कूल और कॉलेज हो, लेकिन अनुदान के नाम पर सिर्फ मदरसे की जांच होगी तो किसी को भी तकलीफ होगी.
उन्होंने कहा, “हम आग्रह करते हैं कि उनकी भी जांच हो जिनको सरकार अनुदान देती है. राइट टू एजुकेशन के तहत अनुदान की बहुत सारी फाइलें सरकार के पास पड़ी हुई हैं उनको क्लीयरेंस मिले.”
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