मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है. हाई कोर्ट ने मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र विवाद में सख्त रुख अपनाते हुए हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को 60 दिनों के भीतर जांच पूरी कर अंतिम निर्णय देने का निर्देश दिया है. जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में अनावश्यक देरी न्याय के हित में नहीं है.
कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया कि संबंधित पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर देते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच की जाए. साथ ही, याचिकाकर्ता और राज्य को 30 अप्रैल 2026 तक आदेश की प्रति कमेटी को भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
क्या है मामला ?
यह मामला कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर रिट पिटीशन (WP-8658-2026) से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने मंत्री के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाते हुए 31 मार्च 2025 को शिकायत दर्ज कराई थी. याचिकाकर्ता का आरोप था कि लंबे समय से शिकायत लंबित रखी गई, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. इससे पहले इसी मुद्दे पर दायर एक अन्य याचिका (WP-5948/2026) ‘लोकस’ स्पष्ट न होने के कारण वापस ले ली गई थी, जिससे मंत्री को अस्थायी राहत मिली थी. हालांकि, कोर्ट ने तब भी भविष्य में उचित प्रक्रिया के तहत मामला उठाने की छूट दी थी.
गौरतलब है कि प्रतिमा बागरी सतना जिले की रैगांव (SC) आरक्षित सीट से विधायक हैं और उनके खिलाफ आरोप है कि वे जिस समुदाय से आती हैं, वह अनुसूचित जाति सूची में शामिल नहीं है. याचिकाकर्ता ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने का आरोप लगाया है, जबकि मंत्री ने इन आरोपों को लगातार निराधार और अपने दस्तावेजों को वैध बताया है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि 30 जून 2026 तक कमेटी निर्णय नहीं लेती है, तो याचिका को पुनर्जीवित किया जा सकेगा. ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले का कानूनी और राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है.
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