- आरोपियों ने विस्फोटक जानकारी जुटाई, सिग्नल ऐप से संवाद किया।
लाल किला ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं. जांच एजेंसी ने ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक (Lone Mujahid Pocket Book)’ और ‘How to Become an Assassin’ जैसे कथित मैनुअल का जिक्र करते हुए दावा किया है कि आरोपियों के पास मौजूद सामग्री सामान्य धार्मिक या शैक्षणिक साहित्य नहीं थी, बल्कि हिंसक और गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली ट्रेनिंग सामग्री थी.
NIA के मुताबिक, इन दस्तावेजों में अकेले हमला करने वाले आतंकी के लिए कई तरह की जानकारी दी गई थी. एजेंसी का आरोप है कि आरोपी इस सामग्री के संपर्क में थे और कथित आतंकी गतिविधियों की तैयारी में इसका इस्तेमाल कर रहे थे.
एनआईए ने पॉकेट बुक को लेकर क्या कहा?
चार्जशीट में लोन मुजाहिद पॉकेट बुक को इंस्पायर मैगजीन (Inspire Magazine) में प्रकाशित सामग्री से जुड़ा बताया गया है. NIA के मुताबिक, इंस्पायर मैगजीन का संबंध अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला यानी AQAP के मीडिया नेटवर्क से रहा है.
जांच एजेंसी का दावा है कि इस सामग्री में अकेले काम करने वाले हमलावरों को ध्यान में रखकर ऑपरेशन और सुरक्षा से बचने जैसे विषयों पर जानकारी दी गई थी. चार्जशीट में हथियारों, गुप्त गतिविधियों, निगरानी से बचने और हमले की रणनीति जैसे विषयों का भी उल्लेख किया गया है.
चार्जशीट में किन-किन चीजों का जिक्र?
NIA ने चार्जशीट में विस्फोटक और IED से जुड़ी गतिविधियों को भी जांच का अहम हिस्सा बताया है. एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने विस्फोटक तैयार करने और IED बनाने से जुड़ी जानकारी हासिल की थी. चार्जशीट में TATP जैसे बेहद संवेदनशील विस्फोटक का भी उल्लेख किया गया है. NIA का दावा है कि आरोपियों के पास मौजूद सामग्री में विस्फोटकों से संबंधित जानकारी मिली थी और ये कथित तौर पर उनकी गतिविधियों से जुड़ी हुई थी.
जांच के दौरान आरोपियों के बीच बातचीत के लिए सिग्नल ऐप के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है. चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी इरफान अहमद सिग्नल पर Rauldatta नाम से संपर्क करता था.
आरोपियों के पास से कौन से दस्तावेज बरामद?
NIA ने आरोपियों के पास से कई ऐसे दस्तावेज मिलने का भी दावा किया है, जिनमें जिहाद और हिंसक गतिविधियों के समर्थन से जुड़ी विचारधारा का प्रचार किया गया था, इनमें ‘Definition of Jihad’, ‘Requirements of Jihad’ और ‘21 Aims and Objectives of Jihad’ जैसे दस्तावेज शामिल बताए गए हैं. चार्जशीट में ‘How to Become an Assassin – The Propagation’ नाम के कथित मैनुअल का भी उल्लेख है.
दस्तावेजों में किन बातों के बारे में बताया गया?
NIA के मुताबिक, इसमें लड़ाई, हथियारों के इस्तेमाल, गुप्त गतिविधियों, निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों से बचने और अन्य ऑपरेशनल गतिविधियों से जुड़ी सामग्री थी. जांच एजेंसी का कहना है कि इस दस्तावेज को सिर्फ पढ़ने की सामग्री नहीं माना जा सकता. उसके मुताबिक, इसे इस तरह तैयार किया गया था कि अलग-अलग तरह की हिंसक और गुप्त गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण जैसी जानकारी मिल सके.
NIA ने चार्जशीट में घटनास्थल से मिले सामान यानी Scene of Crime की फॉरेंसिक और बायोलॉजिकल जांच को भी अहम सबूत बताया है. एजेंसी के मुताबिक, लाल किले के पास हुए विस्फोट में कई लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए. धमाके में वाहनों के अलावा, पुलिस पोस्ट और आसपास की संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा.
चार्जशीट में सबूतों के तीन आधार क्या?
चार्जशीट को देखें, तो NIA ने अपना मामला मुख्य रूप से तीन तरह के सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाया हैः
- आरोपियों के पास से मिली आपत्तिजनक सामग्री और दस्तावेज
- विस्फोटक और IED से जुड़ी कथित गतिविधियों के सबूत
- घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्य
एनआईए की जांच में क्या-क्या पता चला?
जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी कड़ियों को एक साथ देखने पर आरोपियों की कथित भूमिका सामने आती है. जांच के दौरान NIA ने कुछ आरोपियों का फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट और वॉयस लेयरिंग टेस्ट भी कराया. एजेंसी के मुताबिक, ये परीक्षण नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मदद से किए गए.
जिन आरोपियों के इन परीक्षणों से गुजरने की बात चार्जशीट में कही गई है, उनमें जासिर बिलाल वानी, मुजम्मिल शकील, आदिल अहमद राथर, शाहीन सईद, इरफान अहमद वागे, सोयाब और बिलाल नासिर शामिल है. NIA का आरोप है कि पूछताछ के दौरान इन आरोपियों ने मामले से जुड़ी वास्तविक जानकारी छिपाने की कोशिश की और जांचकर्ताओं को गुमराह करने वाले जवाब दिए. एजेंसी का दावा है कि पूछताछ और फॉरेंसिक परीक्षणों से उनकी कथित भूमिका के संकेत मिले.
NIA का दावा- महज किताबें नहीं, साजिश की कड़ी
चार्जशीट में NIA ने इन दस्तावेजों को सिर्फ धार्मिक या अकादमिक सामग्री मानने से इनकार किया है. जांच एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजों में अलग-अलग तरह की ऐसी जानकारी थी, जिसका इस्तेमाल गुप्त अभियानों और हिंसक गतिविधियों में किया जा सकता था. NIA ने इन सामग्रियों को रेड फोर्ट ब्लास्ट की कथित साजिश और आरोपियों की गतिविधियों से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण जांच साक्ष्य के तौर पर चार्जशीट में शामिल किया है.
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