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श्रीनगर में दिहाड़ी कर्मचारियों का आंदोलन तेज, असेंबली घेराव की दी चेतावनी


श्रीनगर में आज (22 सितंबर) दिहाड़ी मजदूरों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी नौकरी पक्की करने (रेगुलराइजेशन) की फाइलें मंजूर नहीं हुईं, तो वे सोमवार, 28 सितंबर को ‘असेंबली घेराव’ करके राज्य विधानसभा को ठप कर देंगे.

‘J&K कैज़ुअल लेबरर्स यूनाइटेड फ्रंट’ के बैनर तले, कई सरकारी विभागों, जैसे पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE)/जल शक्ति, पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (PDD) और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के सैकड़ों अस्थायी, कैजुअल और मौसमी कर्मचारी श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में जमा हुए. उन्होंने बार-बार हो रही प्रशासनिक देरी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया.

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांगें

यूनियन नेताओं ने 28 सितंबर को होने वाले बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले तीन अहम मांगें रखी हैं. इनमें SRO-520 को लागू करना और 60,000 से ज्यादा कैज़ुअल और अस्थायी कर्मचारियों की सेवाओं को तुरंत रेगुलराइज करना शामिल है. इन कर्मचारियों ने अलग-अलग इंजीनियरिंग विभागों में 10 से 20 साल से ज्यादा समय तक काम किया है.

वे रुकी हुई मजदूरी और लंबे समय से बकाया मासिक वेतन के भुगतान की भी मांग कर रहे हैं. कुछ विभागों में यह बकाया 18 से 40 महीनों से अटका हुआ है. साथ ही, वे ‘न्यूनतम मजदूरी अधिनियम’ (Minimum Wages Act) को लागू करने और अपनी मौजूदा दिहाड़ी को राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी मानकों के बराबर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे इलाके में तेजी से बढ़ती महंगाई का सामना कर सकें.

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कर्मचारी नेताओं ने दी ‘असेंबली घेराव’ की चेतावनी

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अभी ऑटम सेशन (पतझड़ सत्र) चल रहा है. ऐसे में यूनियन नेताओं ने जोर देकर कहा कि वे स्थानीय राजनीतिक पार्टियों के खोखले वादों से तंग आ चुके हैं. फ्रंट ने चेतावनी दी कि जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों से हजारों कैज़ुअल कर्मचारी 28 सितंबर को ग्रीष्मकालीन राजधानी (श्रीनगर) पहुंचेंगे.

कर्मचारी नेताओं ने घोषणा की कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे असेंबली कॉम्प्लेक्स को पूरी तरह से घेर लेंगे और आने-जाने के रास्तों को ब्लॉक कर देंगे. उन्होंने कहा कि जब तक उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली कैबिनेट उनकी नौकरी रेगुलराइज करने के लिए कोई आधिकारिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी आदेश जारी नहीं करती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे.

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