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सुकेश चंद्रशेखर की याचिका पर SC का सुनवाई से इनकार, ठग को मिली है 8 साल की सजा


सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने एक आपराधिक मामले में कनविक्शन पर रोक लगाने की मांग की थी. दिल्ली की एक अदालत ने 20 अगस्त को चंद्रशेखर को दोषी ठहराया था. उस पर आरोप है कि उसने 2017 के भ्रष्टाचार के एक मामले में जमानत दिलाने के लिए, एक विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने के मकसद से खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताया था.

इस मामले में 29 अगस्त को अदालत ने उसे 8 साल की जेल की सजा सुनाई. इसके बाद चंद्रशेखर ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उसने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उसकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने की अर्जी खारिज कर दी गई थी. उसने मांग की थी कि उसकी अपील का निपटारा होने तक सजा पर रोक लगाई जाए.

कोर्ट ने क्या कहा
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि दोषसिद्धि के आदेश पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता है. हाई कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत का मानना ​​है कि चूंकि दोषसिद्धि के फैसले के खिलाफ अपील पहले से ही लंबित है, इसलिए याचिकाकर्ता द्वारा फैसले के निष्कर्षों पर जताई गई आपत्तियां जिनमें ट्रायल कोर्ट की प्रतिकूल टिप्पणियां और इस्तेमाल किए गए शब्द भी शामिल हैं  ऐसे मामले हैं जिनकी जांच अपीलीय अदालत द्वारा की जानी चाहिए. 

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि वह अपीलीय अदालत के सामने अपनी सभी दलीलें रख सकता है. हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देने वाली चंद्रशेखर की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया.

8 साल की सजा
दिल्ली की अदालत ने किसी और का रूप धरने के मामले में चंद्रशेखर को 8 साल की जेल की सजा सुनाई है. अदालत ने इस कृत्य को संस्थागत पवित्रता का उल्लंघन करार दिया. अदालत ने उसे सरकारी कर्मचारी का रूप धरने और किसी सरकारी कर्मचारी को धमकाने के अपराध के लिए दो-दो साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और गुमनाम संदेशों के जरिए आपराधिक धमकी देने के लिए 4 साल की सजा दी. 

अदालत ने निर्देश दिया कि ये सभी सजाएं एक के बाद एक क्रमवार चलेंगी, जिससे कुल सजा 8 साल हो जाती है. यह मामला 28 अप्रैल 2017 को की गई एक फोन कॉल से जुड़ा है, जब चंद्रशेखर भ्रष्टाचार के एक मामले के सिलसिले में पुलिस हिरासत में था.

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