अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की 8वीं बरसी से पहले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और सिर्फ एक बार विरोध-प्रदर्शन करने से कोई नतीजा नहीं निकलेगा. राज्य का दर्जा मिलने तक लोकतांत्रिक तरीके से लगातार आवाज उठाई जाती रहेगी.
गांदरबल में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे यह जानते हुए भी विरोध-प्रदर्शन के लिए दिल्ली गए थे कि पहली बार में उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा. उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का वादा अभी भी पूरा नहीं हुआ है.” उनके मुताबिक, इस मुद्दे को लगातार उठाना जरूरी है ताकि केंद्र सरकार तक लोगों की मांग मजबूती से पहुंच सके.
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5 अगस्त का इंतजार नहीं कर रही नेशनल कॉन्फ्रेंस
मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस मुद्दे को उठाने के लिए 5 अगस्त का इंतजार नहीं किया. उन्होंने बताया कि पार्टी पहले ही अपनी मांग को लेकर दिल्ली पहुंच चुकी है और आगे भी इस मुद्दे पर आवाज उठाती रहेगी.
उमर अब्दुल्ला ने कहा, “जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पहले के राज्य के विशेष दर्जे और संवैधानिक गारंटियों के बारे में एक प्रस्ताव पास किया था, जिसे केंद्र को भेजा गया था. 5 अगस्त को जो भी जरूरी कदम उठाने होंगे, वे उठाए जाएंगे, लेकिन पार्टी कार्रवाई करने के लिए उस तारीख का इंतज़ार नहीं कर रही थी.”
PoK के हालात पर भी जताई चिंता
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की स्थिति पर भी मुख्यमंत्री ने चिंता जताई. उन्होंने वहां बल प्रयोग और निर्दोष लोगों को निशाना बनाए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम सभी चिंतित हैं. हम बस यही उम्मीद कर सकते हैं कि वहां भी शांति बनी रहे.”
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अनुच्छेद 370 हटाए जाने की बरसी से पहले उमर अब्दुल्ला के इन बयानों को जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अहम माना जा रहा है. उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग जारी रहेगी और इसे लेकर राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से लगातार प्रयास किए जाएंगे.
