दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित 6-फ्लैगस्टाफ रोड का चर्चित सरकारी आवास जल्द ही नई जिम्मेदारी निभाता दिखाई देगा. कभी मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास के रूप में सुर्खियों में रहा यह परिसर अब सरकारी मेहमानों की मेजबानी और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है. दिल्ली सरकार ने इसे स्टेट गेस्ट हाउस और आधुनिक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में औपचारिक फैसला लिया है.
सरकारी स्तर पर हुई हालिया बैठक में तय किया गया कि इस परिसर का उपयोग केवल प्रशासनिक जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा. भविष्य में यहां सरकारी बैठकों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत, विशिष्ट अतिथियों का आवास तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे राजधानी में लंबे समय से महसूस की जा रही एक महत्वपूर्ण कमी पूरी होगी.
दिल्ली को पहली बार मिलेगा अपना स्टेट गेस्ट हाउस
अब तक दिल्ली सरकार के पास ऐसा कोई समर्पित स्टेट गेस्ट हाउस नहीं था, जहां विभिन्न राज्यों या विदेशों से आने वाले सरकारी प्रतिनिधियों को ठहराया जा सके. हर बार अलग-अलग व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था. नए फैसले के बाद एक स्थायी और अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे सरकारी आयोजनों का संचालन भी अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा.
एक ही परिसर में होंगी कई आधुनिक सुविधाएं
योजना के तहत परिसर में आधुनिक अतिथि कक्ष, सम्मेलन हॉल, बैठक कक्ष और बहुउद्देशीय सभागार तैयार किए जाएंगे. यहां कला प्रदर्शनियां, संगीत और नृत्य कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन, सांस्कृतिक संवाद, सरकारी समारोह और विभिन्न विभागों के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा सकेंगे. सरकार का उद्देश्य इस परिसर को प्रशासनिक उपयोग के साथ-साथ राजधानी की सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ना है.
ऐतिहासिक भवन के मूल स्वरूप को रखा जाएगा सुरक्षित
अधिकारियों के अनुसार विकास कार्य इस तरह किए जाएंगे कि मौजूदा भवन में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की जरूरत न पड़े. कोशिश रहेगी कि ऐतिहासिक महत्व वाले इस परिसर की मूल संरचना को अधिकतम सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएं.
राजनीतिक विवादों के चलते सुर्खियों में रहा था बंगला, मिला ‘शीशमहल’ का नाम
यह वही सरकारी आवास है, जो पिछले कुछ वर्षों में पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण पर हुए खर्च को लेकर राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहा. भारतीय जनता पार्टी ने इसे चुनावी अभियान के दौरान ‘शीशमहल’ नाम दिया था और विधानसभा चुनाव प्रचार में इसे प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया था. इस वजह से यह बंगला लंबे समय तक सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा में बना रहा.
ब्रिटिश काल में हुआ था निर्माण, कई नेताओं का रहा आवास
करीब आठ दशक पहले वर्ष 1942 में ब्रिटिश शासन के दौरान इस विशाल सरकारी भवन का निर्माण कराया गया था. बाद के वर्षों में यह कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के आवास के रूप में उपयोग में रहा. वर्ष 2004 से 2008 तक तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष प्रेम सिंह यहां रहे, जबकि बाद में विधानसभा के उपाध्यक्ष अमरीश गौतम को यह आवंटित किया गया. वर्ष 2015 से यह तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का आधिकारिक निवास बन गया.
सीएजी रिपोर्ट के बाद बढ़ा था विवाद, अभियंताओं पर भी हुई कार्रवाई
इस परिसर के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण से जुड़े खर्च पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट सहित विभिन्न जांचों में प्रक्रियागत सवाल उठाए गए थे. मामले से जुड़े कथित निर्माण संबंधी अनियमितताओं के चलते लोक निर्माण विभाग के आठ वरिष्ठ अभियंताओं पर कार्रवाई भी की गई. बताया जाता है कि इस कार्रवाई का असर उनके सेवा रिकॉर्ड, पदोन्नति और भविष्य की प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी पड़ा.
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