Sawan 2026: श्रावण मास का पावन समय आते ही उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ केवल ‘ताला नगरी’ के रूप में ही नहीं, बल्कि आस्था की नगरी के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना लेता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि ब्रज क्षेत्र से सटा अलीगढ़ अपने प्राचीन शिवालयों, पौराणिक मान्यताओं और सदियों पुरानी धार्मिक विरासत के कारण ‘मिनी वृंदावन’ के नाम से भी जाना जाता है.
सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां स्थित प्रमुख शिव मंदिरों में हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विशेष सुरक्षा व्यवस्था करती है. यही वजह है कि सावन के दौरान अलीगढ़ का धार्मिक स्वरूप और भी भव्य दिखाई देता है.
क्यों खास है अलीगढ़ की धार्मिक पहचान?
अलीगढ़ को लोग ताले, शिक्षा और ऐतिहासिक विरासत के लिए जानते हैं, लेकिन इसकी एक पहचान धार्मिक आस्था भी है. जिले में कई ऐसे प्राचीन शिवालय मौजूद हैं जिनका संबंध महाभारत काल, द्वापर युग और पुराणों में वर्णित घटनाओं से जोड़ा जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कई स्थान ऐसे हैं जहां देवताओं ने तप किया, विश्राम किया या शिवलिंग की स्थापना की.
इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के कारण हर साल सावन में प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
खेरेश्वर धाम: जहां आज भी अश्वत्थामा के आने की मान्यता:
अलीगढ़ शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर खैर बाईपास के पास स्थित खेरेश्वर धाम जिले के सबसे प्रसिद्ध शिवालयों में गिना जाता है. यह सिद्धपीठ द्वापर युग से जुड़ा माना जाता है.
लोकमान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने यहां विश्राम किया था तथा बलराम ने इसी क्षेत्र में कोलासुर का वध किया था. एक और प्रचलित मान्यता यह भी है कि महाभारत के अमर योद्धा अश्वत्थामा आज भी रात्रि में यहां आकर शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं. यही विश्वास इस मंदिर को श्रद्धालुओं के बीच विशेष बनाता है.
मंदिर की धातु निर्मित छत, सुंदर स्थापत्य और परिसर में स्थापित विभिन्न देवी-देवताओं की पीतल की प्रतिमाएं भी आकर्षण का केंद्र हैं.
अचलेश्वर महादेव: रंग बदलने वाला स्वयंभू शिवलिंग:
अलीगढ़ शहर के अचल ताल क्षेत्र में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है.
स्थानीय परंपराओं के अनुसार यह मंदिर महाभारत काल का है और यहां पांडवों के पुत्र नकुल एवं सहदेव ने भगवान शिव की आराधना की थी. मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग है, जिसके बारे में श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वह दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है. इसी कारण यह मंदिर सालों से श्रद्धा और जिज्ञासा दोनों का केंद्र बना हुआ है.
पाताली बाबा मंदिर: पाताल से प्रकट होने की मान्यता:
अलीगढ़ मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर अतरौली क्षेत्र में स्थित पाताली बाबा मंदिर भी शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां का शिवलिंग पाताल लोक से प्रकट हुआ था. ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस मंदिर को दिव्य शक्ति और चमत्कारी आस्था का केंद्र मानते हैं. सावन और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.
कुमारेश्वर महादेव: जहां स्थापित हैं तीन रहस्यमयी शिवलिंग:
इगलास तहसील के गांव सहारा खुर्द स्थित श्री कुमारेश्वर महादेव (पाताल खेड़िया) मंदिर अलीगढ़ की सबसे प्राचीन धार्मिक धरोहरों में शामिल है.
यह मंदिर लगभग पांच हजार साल पुराना है और इसका उल्लेख स्कंद पुराण तथा शिव पुराण में भी मिलता है. यहां तीन प्राचीन शिवलिंग कुमारेश्वर, प्रतिज्ञेश्वर और कपालेश्वर स्थापित हैं, जो भूमि के भीतर गहराई में स्थित बताए जाते हैं.
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने इन शिवलिंगों की स्थापना की थी. हर साल महाशिवरात्रि और सावन के दौरान यहां विशाल संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. वर्तमान में इस प्राचीन मंदिर के भव्य जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य भी किया जा रहा है ताकि इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को और सशक्त बनाया जा सके.
सावन में क्यों उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़?
श्रावण मास भगवान शिव की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. अलीगढ़ के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालु गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं.
भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए प्रशासन मंदिर परिसरों में सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम करता है, ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे.
अलीगढ़: ताला नगरी से आगे, आस्था की पहचान:
अलीगढ़ की पहचान केवल उद्योग, शिक्षा या ताला निर्माण तक सीमित नहीं है. यहां के प्राचीन शिवालय, उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं और सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराएं इसे उत्तर प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल करती हैं.
अगर आप सावन में किसी ऐसे धार्मिक स्थल की यात्रा करना चाहते हैं जहां इतिहास, आस्था और पौराणिक परंपराएं एक साथ देखने को मिलें, तो अलीगढ़ के ये प्राचीन शिवालय निश्चित रूप से आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं.
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Input By : ख़ालिक़ अन्सारी
