लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को महिलाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए पितृसत्तात्मक सोच पर तीखा हमला किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को दूसरों पर निर्भर बनाकर रखना ‘मनुस्मृति की मानसिकता’ का हिस्सा है और महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आगे आना चाहिए.
राहुल गांधी के इस बयान पर बवाल शुरू हो गया है. इसको लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने निशाना साध दिया है. उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, “राहुल गांधी जी वारेन हैसटिंग ब्रिटेन के गवर्नर जनरल ने 27 मार्च 1775 को 11 पंडितों, विद्वानों की एक समिति बनाई, जिसका उद्देश्य भारत में उपलब्ध सभी संस्कृत, पाली ग्रंथ का अनुवाद और अध्ययन करना था.
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राहुल गांधी के बयान पर निशिकांत दुबे का पलटवार
दुबे ने आगे कहा, “आज भारत में जितने ग्रंथ पर चर्चा होती है, सभी अंग्रेजों की कमेटी द्वारा अनुवादित किए गए हैं. उस कमेटी की अनुवाद सहित रिपोर्ट 1777 में गवर्नर जनरल को सौंपी गई थी. 1777 की रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि ‘मनुस्मृति’ के कुछ श्लोक सही हैं. कुछ गलत हैं. काल्पनिक कालखंड है, दूसरे विद्वान ने अपने शब्दों को मनुस्मृति में घुसेड़ने का प्रयास किया है.
राहुल गांधी जी @RahulGandhi ,वारेन हैसटिंग ब्रिटेन के गवर्नर जनरल ने 27 मार्च 1775 को 11 पंडितों / विद्वानों का एक समिति बनाया,जिसका उद्देश्य था,भारत में उपलब्ध सभी संस्कृत,पाली ग्रंथ का अनुवाद/ अध्ययन करना था।आज भारत में जितने ग्रंथ पर चर्चा होती है,सभी अंग्रेजों की कमिटि द्वारा… pic.twitter.com/mrk8kZc4o1
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) August 24, 2026
वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए निशिकांत दुबे ने कहा, “पार्टी को सनातन धर्म के अलावा यही विचार अन्य धर्म ग्रंथों में भी देखना चाहिए. यह देश तो हिन्दू-मुस्लिम, ईसाई का भी है.” उनके इस बयान के बाद सियासत फिर गरमा गई है.
राहुल गांधी ने दिया ये बयान
दरअसल राहुल गांधी ने पुणे में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं और वे सिर्फ खुद की हैं. उन्होंने युवतियों से सामाजिक बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ने का आह्वान किया.
जेनजी की बड़ी संख्या में मौजूद छात्राओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनका यह कार्यक्रम राजनीति पर नहीं, बल्कि युवाओं के विचारों, शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद के लिए है.कार्यक्रम के दौरान कई छात्राओं ने मंच पर आकर अपनी व्यक्तिगत चुनौतियों और अनुभवों को भी साझा किया.
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