दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सोमवार को जारी मसौदा मतदाता सूची में 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख से अधिक लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। जिन लोगों के नाम मसौदा सूची में नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावा दाखिल कर नाम शामिल कराने का अनुरोध कर सकते हैं।
दिल्ली एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने प्रतिक्रिया दी है. संदीप दीक्षित ने नाम काटे जाने पर कहा, “47 लाख बड़ा नंबर है क्योंकि दिल्ली में 1.5 करोड़ वोटर हैं. यह एक तिहाई के बराबर है। दिल्ली के कुछ हिस्सों में लोग आते-जाते रहते हैं या ट्रांसफर होते हैं। हालांकि, दिल्ली के 70 से 80% हिस्से में इस तरह की आवाजाही नहीं होती है। कम से कम दो-चार साल में तो आवाजाही नहीं होती है.”
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संदीप दीक्षित ने ड्राफ्ट लिस्ट पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता का कहना है कि ऐसे में 47 लाख नाम काटना बड़ा सवाल है. क्या आंकड़े हैं? कितने फॉर्म भरे गए हैं? क्यों फॉर्म नहीं भरे गए हैं. क्योंकि मुझे पता है बहुत से मामलों में लोगों के पास न तो पूरी डिटेल्स थी और न ही पूराना डेटा निकाल पाए तो यह नंबर अपने आप में संदेह पैदा करता है. लेकिन इसकी थोड़ी तहकीकात करनी पड़ेगी कि क्या कहानी है.
उन्होंने आगे कहा, “जिन लोगों का डेटा नहीं मिला है और अगर वो लिस्टें मिल जाएं जो पहले थीं जिनके पास अब नहीं हैं और वो लोग अपनी-अपनी जगह पर हैं तो फिर राजनीतिक दलों का काम यह हो जाएगा कि जाकर उन लिस्टों को स्थानीय इलाकों में वेरिफाई करना शुरू करें.”
संदीप दीक्षित ने आगे कहा कि नेताओं का जाकर पता करना होगा कि आखिर क्या कारण है जिस वजह से उनके वोट कटे हैं. खासकर जहां पर ज्यादा वोट कटे हैं वहां जाकर यह भी वेरिफाई करें कि जो चुनाव आयोग कारण बता रहा है वही है या फिर कुछ और कारण है.
अलग-अलग इलाकों को लेकर क्या बोले कांग्रेस नेता?
संदीप दीक्षित ने बताया, “नई दिल्ली सीट पर बहुत लोग आते-जाते हैं, लेकिन चांदनी चौक, बल्लीमारान या शीलमपुर का इलाका ले लीजिए यहां पर इतनी आवाजाही नहीं है. यह पुराने बसे हुए इलाके हैं. यहां पर जो लोग पहले से रहते हैं वहीं रह रहे हैं. थोड़े-बहुत मजदूर आते-जाते रहते हैं. ऐसे में और इलाकों में भी ऐसा ही होगा.”
उन्होंने 2.5 लाख मृत लोगों की संख्या पर कहा, “यह अपने आप में बहुत ही हैरानी वाला नंबर नहीं है क्योंकि इतना बड़ा शहर है तो हो सकता है कि इतने लोग मृत हों. बाकी 1 से 1.5 लाख जो डुप्लीकेट वोटर्स बताए हैं वो हो सकता है. बात यह है कि 44 लाख लोग अगर नहीं हैं तो इसकी तहकीकात फिर से करनी पड़ेगी, क्योंकि ज्यादातर सर्वे में हमने देखा है कि जरूरी नहीं है व्यक्ति वहां पर मौजूद हों या फॉर्म भरें, नहीं भरें.”
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, “इस तरीके की कोताही शहरों में ज्यादा देखी जाती है. फिर चुनाव के समय लोग जागते हैं. गांव और ग्रामीण इलाकों में लोग ज्यादा सजग होते हैं. शहरों में थोड़ी आत्मसंतुष्टि होती है. अगर ये इन लिस्टों को जारी कर देते है और यह लोगों तक पहुंच जाती हैं तो जितने भी राजनीतिक दल हैं वो उस पर एक अच्छी मेहनत कर सकते हैं.”
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