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उज्बेकिस्तान में कितने हिंदू रहते हैं, जानें इस देश की आबादी?


भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उज्बेकिस्तान मध्य एशिया का एक बेहद महत्वपूर्ण देश है. धार्मिक संरचना के लिहाज से इसे मुस्लिम बहुल देश की श्रेणी में रखा जाता है. आधिकारिक और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल आबादी का लगभग 94 प्रतिशत से 97 प्रतिशत हिस्सा इस्लाम धर्म का अनुयायी है.

यहां रहने वाले अधिकांश मुसलमान सुन्नी परंपरा के हनफी विचार को मानते हैं. हालांकि, संवैधानिक रूप से उज्बेकिस्तान पूरी तरह से एक धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में कार्य करता है, जहां राज्य का कोई अपना आधिकारिक धर्म नहीं है और कानून की नजर में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं.

यहां रहने वाले अधिकांश मुसलमान सुन्नी परंपरा के हनफी विचार को मानते हैं. हालांकि, संवैधानिक रूप से उज्बेकिस्तान पूरी तरह से एक धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में कार्य करता है, जहां राज्य का कोई अपना आधिकारिक धर्म नहीं है और कानून की नजर में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं.

वर्तमान में उज्बेकिस्तान की कुल जनसंख्या लगभग 3.8 करोड़ दर्ज की गई है. इस आबादी में गैर-मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की हिस्सेदारी करीब 3 फीसदी से लेकर 6 फीसदी के बीच सीमित है.

वर्तमान में उज्बेकिस्तान की कुल जनसंख्या लगभग 3.8 करोड़ दर्ज की गई है. इस आबादी में गैर-मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की हिस्सेदारी करीब 3 फीसदी से लेकर 6 फीसदी के बीच सीमित है.

देश में इस्लाम के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह ईसाइयत का है, जिसमें लगभग 1 से 2 प्रतिशत लोग शामिल हैं. ईसाई समुदाय में मुख्य रूप से रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च को मानने वाले नागरिक रहते हैं.

देश में इस्लाम के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह ईसाइयत का है, जिसमें लगभग 1 से 2 प्रतिशत लोग शामिल हैं. ईसाई समुदाय में मुख्य रूप से रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च को मानने वाले नागरिक रहते हैं.

इसके अतिरिक्त, देश में लगभग 4 प्रतिशत ऐसे लोग भी निवास करते हैं जो नास्तिक हैं या किसी भी संगठित धर्म से अपना जुड़ाव नहीं रखते हैं. उज्बेकिस्तान के समाज में बौद्ध धर्म, यहूदी और अन्य छोटे धार्मिक समूहों की मौजूदगी भी देखी जाती है, जिनकी संयुक्त आबादी कुल जनसंख्या के 1 प्रतिशत से भी कम है.

इसके अतिरिक्त, देश में लगभग 4 प्रतिशत ऐसे लोग भी निवास करते हैं जो नास्तिक हैं या किसी भी संगठित धर्म से अपना जुड़ाव नहीं रखते हैं. उज्बेकिस्तान के समाज में बौद्ध धर्म, यहूदी और अन्य छोटे धार्मिक समूहों की मौजूदगी भी देखी जाती है, जिनकी संयुक्त आबादी कुल जनसंख्या के 1 प्रतिशत से भी कम है.

यदि भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदाय के आंकड़ों पर नजर डालें, तो विभिन्न वैश्विक रिपोर्ट्स और अनुमानों के अनुसार देश में लगभग 20,000 हिंदू निवास करते हैं. इनमें से अधिकांश लोग ताशकंद, समरकंद और बुखारा जैसे प्रमुख व्यावसायिक शहरों में रहते हैं, जो व्यापार, शिक्षा, और भारतीय कॉरपोरेट गतिविधियों के सिलसिले में वहां बसे हुए हैं.

यदि भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदाय के आंकड़ों पर नजर डालें, तो विभिन्न वैश्विक रिपोर्ट्स और अनुमानों के अनुसार देश में लगभग 20,000 हिंदू निवास करते हैं. इनमें से अधिकांश लोग ताशकंद, समरकंद और बुखारा जैसे प्रमुख व्यावसायिक शहरों में रहते हैं, जो व्यापार, शिक्षा, और भारतीय कॉरपोरेट गतिविधियों के सिलसिले में वहां बसे हुए हैं.

उज्बेकिस्तान में हिंदुओं और भारतीय समुदाय की उपस्थिति भले ही संख्या बल में कम हो, लेकिन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध सदियों पुराने सिल्क रूट के जमाने से चले आ रहे हैं. प्राचीन काल से ही भारतीय व्यापारी मध्य एशिया के इन शहरों में व्यापार के लिए जाते रहे हैं.

उज्बेकिस्तान में हिंदुओं और भारतीय समुदाय की उपस्थिति भले ही संख्या बल में कम हो, लेकिन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध सदियों पुराने सिल्क रूट के जमाने से चले आ रहे हैं. प्राचीन काल से ही भारतीय व्यापारी मध्य एशिया के इन शहरों में व्यापार के लिए जाते रहे हैं.

आज भी ताशकंद में भारतीय फिल्में, योग और संगीत बेहद लोकप्रिय हैं. यही वजह है कि सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोस्तलिक यानी दोस्ती शब्द का विशेष उल्लेख करते हुए इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दिलों के गहरे जुड़ाव का प्रतीक बताया.

आज भी ताशकंद में भारतीय फिल्में, योग और संगीत बेहद लोकप्रिय हैं. यही वजह है कि सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोस्तलिक यानी दोस्ती शब्द का विशेष उल्लेख करते हुए इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दिलों के गहरे जुड़ाव का प्रतीक बताया.

Published at : 31 Aug 2026 06:24 PM (IST)

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