प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में भाग लेने पहुंचे. जहां उन्होंने जेन जी के स्टाइल में कहा कि यहां के एल्युमिनाई OG हैं. पीएम मोदी के ऐसा बोलने पर जोरदार ठहाके लगे. पीएम मोदी ने कहा कि सौ से अधिक साल से श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) ने छात्रों की पीढ़ियों को सीखने, आगे बढ़ने और बदलाव लाने का अवसर प्रदान किया है.
पीएम मोदी ने कहा, साल 2013 में घोटाले चरम पर थे. देश निराशा के दलदल में था. निराशाजनक खबरें आती रहती थी. बता दें कि साल 2013 में देश में कांग्रेस की सरकार थी.
#WATCH | Delhi: At the centenary celebrations of Shri Ram College of Commerce (SRCC), Prime Minister Narendra Modi says, “The alumni of SRCC have also been very special. In your language, I would say the alumni here are the OGs. They have taken the name of SRCC across the world… pic.twitter.com/MvPvz2kGNi
— ANI (@ANI) September 5, 2026
कॉलेज के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का भाषण
प्रधानमंत्री मोदी ने कॉलेज के शताब्दी समारोह में कहा, ”SRCC के छात्र अपने कॉलेज की प्रसिद्धि को वैश्विक स्तर पर ले गये. मैं जब 2013 में SRCC में पहुंचा था तब मैं प्रतिपक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहा था, किंतु इसके बावजूद मैंने इस मंच का इस्तेमाल तत्कालीन सरकार की आलोचना करने के लिए नहीं किया.SRCC में 2013 में दिया गया मेरा भाषण एक ‘वेब’ बन गया था और आज 13-14 साल बाद भी उस भाषण का असर बरकरार है. नीतिगत पंगुता से नीतिगत गतिशीलता तक, भारत ने एक लंबा सफर तय किया है.” PM मोदी ने मौजूदा जीडीपी पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर उसकी आर्थिक मजबूती को दर्शाती है.
‘मेड इन इंडिया’ से लेकर आज तक का जिक्र
PM मोदी ने अपने 2013 के भाषण में ‘मेड इन इंडिया’ की जरूरत बताए जाने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उस समय कुछ लोगों को यह विचार मुश्किल या असंभव लगता था, लेकिन आज भारत में बने उत्पादों और देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की पहचान बढ़ी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि वह SRCC में अपना ‘रिपोर्ट कार्ड’ लेकर आए हैं. उनके भाषण का मुख्य संदेश यही रहा कि 2013 में जिस बदलाव और आत्मनिर्भरता की बात उन्होंने की थी, उसके बाद भारत की अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था में कई बदलाव हुए हैं.
