खेतों में लगातार पानी भरे रहने से सबसे बड़ा खतरा फफूंद वाली बीमारियों का बढ़ जाता है. गन्ने की फसल पर लाल सड़न यानी रेड रॉट और पोक्का बोइंग जैसी खतरनाक बीमारियां तेजी से हमला बोलती हैं. एक बार अगर यह बीमारियां खेत में फैल गईं. तो पूरी की पूरी फसल देखते ही देखते बर्बाद हो सकती है.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश का पानी खेत में 24 से 48 घंटे से ज्यादा नहीं ठहरना चाहिए. जैसे ही बारिश थमे किसान सबसे पहले अपने खेतों का मुआयना करें. अगर कहीं भी पानी रुका हुआ नजर आए तो बिना देरी किए नालियां बनाकर उस गंदे पानी को बाहर निकालने का इंतजाम करें.

अगर खेत में पानी भरा रहेगा तो मिट्टी में मौजूद हवा खत्म हो जाती है. ऐसे में गन्ने की जड़ें सड़ना शुरू हो जाती हैं और पौधों की खुराक रुक जाती है. पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और गन्ने की मोटाई और लंबाई बढ़ती नहीं है. जिससे आखिर में गन्ने के वजन और पैदावार दोनों नीचे आ जाते हैं.

इतना ही नहीं ज्यादा नमी वाले माहौल में कीटों का हमला भी बहुत तेजी से होता है. गन्ने का तना छेदक और चोटी बेधक कीट इस मौसम में सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं. पत्तियों पर हल्के सफेद या भूरे धब्बे दिखते ही समझ जाएं कि बीमारी ने अपनी दस्तक दे दी है. इसलिए रेगुलर देखभाल बेहद जरूरी है.

बचाव के लिए जरूरी है कि किसान खेत की मेड़ों को दुरुस्त रखें और जल निकासी का रास्ता हमेशा खुला रखें. जिन खेतों में पानी निकलने का सही ढलान नहीं है. वहां बीच-बीच में छोटी-छोटी नालियां काट दें. पानी निकलने की व्यवस्था जितनी मजबूत होगी गन्ने की जड़ें उतनी ही स्वस्थ रहेंगी और पौधा तेजी से अपनी ताकत पकड़ेगा.

अगर फसल पर बीमारी के शुरुआती लक्षण नजर आएं तो तुरंत कृषि वैज्ञानिकों या नजदीकी गन्ना विभाग के अधिकारियों से सलाह लें. वे मौसम और फसल की सही स्थिति देखकर सही फफूंदनाशक दवा का छिड़काव बताएंगे. खुद से कोई भी गलत केमिकल डालने से बचें नहीं तो फसल को दोहरा नुकसान पहुंच सकता है.

रेड रॉट बीमारी को गन्ने का कैंसर कहा जाता है. जो जलभराव वाले खेतों में आग की तरह फैलती है. अगर किसी पौधे का तना अंदर से लाल दिखने लगे और उसमें से सिरके जैसी बदबू आए. तो उस पौधे को तुरंत जड़ से उखाड़कर खेत से दूर कहीं गड्ढे में दबा दें या जला दें.

गन्ना किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत सिर्फ इस पानी के ठहराव से मिट्टी में मिल सकती है. इसलिए मौसम के मिजाज को हल्के में बिल्कुल न लें. खेत को सूखा और हवादार बनाए रखने की कोशिश करें जिससे आने वाले पेराई सत्र में आपको गन्ने का भरपूर वजन और तगड़ा मुनाफा अपनी जेब में मिल सके.
Published at : 06 Sep 2026 03:08 PM (IST)
