तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और विपक्षी डीएमके के बीच राजनीतिक टकराव मंगलवार को और तेज हो गया. पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आपातकाल के दौरान MISA के तहत गिरफ्तारी का मुद्दा सदन में उठा तो विवाद उनके पुराने जबड़े की चोट तक पहुंच गया. विजय के एक इशारे को विपक्ष ने स्टालिन की शारीरिक स्थिति का मजाक उड़ाने वाला बताया और इसे बॉडी-शेमिंग करार दिया.
मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में MISA यानी मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट का जिक्र करते हुए स्टालिन की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि MISA के इतिहास को लेकर सदन में बार-बार चर्चा की जाती है और इस पर पहले भी बातें सामने आ चुकी हैं. विजय ने इस मुद्दे को विपक्ष के पुराने दावों से जोड़ते हुए स्टालिन पर राजनीतिक हमला किया. इसी दौरान विजय ने अपना दायां हाथ जबड़े के पास रखा. विपक्षी नेताओं ने इस इशारे को स्टालिन के उस जबड़े की चोट से जोड़ दिया, जो उन्हें आपातकाल के दौरान हिरासत में रहने के समय लगी थी. इस पर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया.
विजय ने दी सफाई
तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जबड़े वाले मामले पर सफाई दी. उन्होंने एक्स पर लिखा कि मैं यह साफ करना चाहता हूं कि 7 सितंबर को लेजिस्लेटिव असेंबली में पुलिस डिपार्टमेंट की ग्रांट रिक्वेस्ट पर मेरे जवाबी भाषण के दौरान, मेरी बॉडी लैंग्वेज, जो अनजाने में बीच में आ गई. यह सब किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं किया गया था. इस वजह से मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हूं कि इसे किसी की पर्सनल भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया गया काम न समझा जाए.
சட்டமன்றத்தில் 7.9.2026 அன்று காவல்துறை மானிய கோரிக்கையில், என்னுடைய பதிலுரையின் இடையேயான எனது உடல்மொழி எதேச்சையாக வெளிப்பட்டதுதானே தவிர, அது எவ்வகையிலும் உள்நோக்கம் கொண்டதில்லை என்பதைத் தெரிவித்துக்கொள்கிறேன். ஆகவே, தனிப்பட்ட முறையில் யார் மனதையும் புண்படுத்துகிற செயலாக அதை…
— TVK Vijay (@TVKVijayHQ) September 8, 2026
CPM नेता ने लगाया बॉडी-शेमिंग का आरोप
CPM के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने विजय के इशारे की आलोचना की. उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान स्टालिन को हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिस की मारपीट में उनके जबड़े में चोट लगी थी. शनमुगम ने किसी नेता की शारीरिक स्थिति का मजाक उड़ाने को गलत बताया और मुख्यमंत्री के इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाया. खास बात यह है कि CPM विधानसभा में विजय सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है. इसके बावजूद शनमुगम ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री की खुलकर आलोचना की.
DMK विधायकों ने किया विरोध
विजय के बयान और MISA से जुड़े मुद्दे पर DMK विधायकों ने सदन में विरोध जताया. पार्टी ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों को विधानसभा की कार्यवाही से हटाने की मांग की. विरोध बढ़ने के बाद DMK विधायकों ने स्पीकर के चैंबर के बाहर भी प्रदर्शन किया. बाद में मार्शलों ने प्रदर्शन कर रहे विधायकों को वहां से हटाया. स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने मुख्यमंत्री की MISA संबंधी टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग स्वीकार नहीं की. उनका कहना था कि मुख्यमंत्री ने उन मुद्दों का उल्लेख किया, जिन पर सदन में पहले भी चर्चा हो चुकी है.
स्टालिन ने विधानसभा की कार्यवाही पर उठाए सवाल
इस विवाद के बाद एमके स्टालिन ने भी विधानसभा के संचालन के तरीके पर नाराजगी जताई. उन्होंने सवाल किया कि क्या सदन की कार्यवाही वास्तव में गरिमा के साथ चल रही है. उनका कहना था कि सदन की स्थिति ऐसी बन गई है कि खुद यह सवाल उठने लगा है कि कार्यवाही किस तरह संचालित की जा रही है.
MISA गिरफ्तारी पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
एमके स्टालिन के MISA के तहत हिरासत में लिए जाने का मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में नया नहीं है. आपातकाल के दौरान उनकी गिरफ्तारी और हिरासत में उनके साथ हुई कथित मारपीट का जिक्र स्टालिन कई मौकों पर कर चुके हैं. वहीं, इस गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक विरोधी समय-समय पर सवाल भी उठाते रहे हैं. मौजूदा विवाद ने करीब पांच दशक पुराने आपातकाल के इतिहास को एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में ला दिया है. विधानसभा में MISA, भ्रष्टाचार के आरोप और व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है.
