मोहम्मद रिजवान की पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (NCCIA) के नोटिस के खिलाफ याचिका लाहौर हाई कोर्ट ने खारिज कर दी. एनसीसीआईए इस समय रिजवान और इमाम के मोबाइल की फोरेंसिक जांच करा रही है. अगले हफ्ते तक ये रिपोर्ट पीसीबी को सौंपी जाएगी. बता दें कि एजेंसी ने रिजवान और इमाम उल हक के खिलाफ नोटिस जारी किया था. दोनों उन 7 खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्हें इंग्लैंड दौरे के बीच पीसीबी ने टीम से बाहर कर वापस घर भेज दिया था.
गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद लाहौर हाई कोर्ट ने मोहम्मद रिजवान की याचिका खारिज कर दी. वकील काजी उमैर अली रिजवान के वकील थे, जिनकी दलील सुनने के बाद चीफ जस्टिस आलिया नीलम ने फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि, “आपको जाकर नोटिस का जवाब देना चाहिए.”
मोहम्मद रिजवान को ये नोटिस कब जारी हुए? इसका जवाब देते हुए रिजवान के वकील ने बताया कि लॉर्ड्स टेस्ट के बाद उन्हें होटल की लॉबी में बुलाया गया. उनसे पूछताछ हुई और फिर फोन ले लिया गया. बताया गया था कि 3 घंटे बाद फोन वापस मिल जाएगा, लेकिन फोन नहीं दिया गया.
रिजवान के वकील ने तर्क दिया कि आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट को शामिल करना चाहिए था. उन्होंने नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये एनसीसीआईए का मामला नहीं है.
यह भी पढ़ें- क्रिकेट जगत में फिर आया ‘मैच फिक्सिंग’ का भूचाल, इन 2 लोगों पर लगे गंभीर आरोप
अभी जो खबर है उसके अनुसार एनसीसीआईए मोबाइल की फोरेंसिक जांच करके अगले हफ्ते तक पीसीबी को रिपोर्ट भेज सकता है. इसके बाद ही तय होगा कि रिजवान और इमाम को राहत दी जाए या सजा.
पाकिस्तान ने हाल ही में इंग्लैंड के हाथों टेस्ट सीरीज 0-3 से गंवाई. लॉर्ड्स में हुए दूसरे टेस्ट के बाद पीसीबी ने मोहम्मद रिजवान समेत 7 खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर दिया था. इमाम उल हक पर भी सवाल उठे, जो मामूली चोट के कारण लॉर्ड्स की दोनों पारियों में बल्लेबाजी के नहीं आए.
यह भी पढ़ें- ICC में बड़ा बदलाव! जय शाह के साथ जुड़ा ये शख्स; बदल गया पूरा इतिहास
