Parivartini Ekadashi Vrat Paran 2026: घड़ी में आज रात 9:43 बजे एकादशी खत्म हो जाएगी और द्वादशी लग जाएगी. फिर व्रत खोलने के लिए अगली सुबह तक इंतजार क्यों? एकादशी पारण का यही नियम अक्सर लोगों को कन्फ्यूज करता है.
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत आज 22 सितंबर 2026 को रखा जा रहा है. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि रात 9 बजकर 43 मिनट पर समाप्त हो जाएगी और इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी.
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ऐसे में व्रत रखने वालों के मन में सवाल हो सकता है कि जब रात में ही एकादशी समाप्त हो रही है तो क्या 9:43 बजे के बाद व्रत खोला जा सकता है? इसका जवाब है, नहीं. एकादशी तिथि समाप्त होने और व्रत का पारण करने का समय एक ही बात नहीं है.
रात 9:43 बजे खत्म होगी एकादशी तिथि
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू हुई थी और 22 सितंबर की रात 9:43 बजे समाप्त होगी. इसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी. उदया तिथि के आधार पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा जा रहा है.
9:43 बजे द्वादशी लग जाएगी, फिर व्रत क्यों नहीं खोल सकते?
यहीं तिथि और पारण का अंतर समझना जरूरी है. एकादशी व्रत केवल एकादशी तिथि खत्म होते ही नहीं खोला जाता. धार्मिक पंचांगों में एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करने का विधान बताया गया है. इसलिए रात 9:43 बजे द्वादशी शुरू हो जाने के बावजूद उसी रात भोजन करके व्रत समाप्त नहीं किया जाएगा.
यानी घड़ी में रात 9:43 बजे तिथि जरूर बदल जाएगी, लेकिन व्रत का धार्मिक क्रम अगले दिन होने वाले पारण के बाद ही पूरा होगा.
परिवर्तिनी एकादशी का पारण कब होगा?
दिल्ली के समय के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण बुधवार, 23 सितंबर 2026 को सूर्योदय के बाद किया जाएगा.
पंचांग स्रोतों में पारण की अंतिम सीमा को लेकर कुछ अंतर मिलता है. पंचांग के अनुसार दिल्ली के लिए सुबह 6:09 से 8:35 बजे तक पारण का समय रहेगा, जबकि ISKCON Delhi अपने अनुयायियों के लिए 6:09 से 10:12 बजे का समय बताता है. इसलिए जिस परंपरा या पंचांग के अनुसार व्रत रखा गया है, उसी के पारण समय का पालन करना बेहतर है.
हरि वासर का भी रखा जाता है ध्यान
एकादशी पारण में केवल द्वादशी लगना पर्याप्त नहीं माना जाता. परंपरागत नियमों में हरि वासर का भी ध्यान रखा जाता है और इस अवधि में पारण नहीं किया जाता. उपलब्ध दिल्ली पंचांग गणना के अनुसार हरि वासर 23 सितंबर तड़के करीब 4 बजे समाप्त हो जाएगा. चूंकि पारण सूर्योदय के बाद होना है, इसलिए निर्धारित सुबह के समय में व्रत खोला जा सकता है.
रात में भूख लगे तो क्या करें?
यदि आपने निर्जला व्रत का संकल्प लिया है तो पारण तक उसी संकल्प का पालन किया जाता है. फलाहार या सामान्य एकादशी उपवास करने वाले श्रद्धालु भी अपने संकल्प और परंपरा के अनुसार ही आहार लेते हैं. रात 9:43 बजे एकादशी तिथि समाप्त होने को सामान्य भोजन शुरू करने का समय नहीं समझना चाहिए.
एक लाइन में समझें पूरा नियम
22 सितंबर रात 9:43 बजे एकादशी समाप्त, द्वादशी शुरू होगी तो रात में व्रत नहीं खोलना है. 23 सितंबर सूर्योदय के बाद निर्धारित पारण मुहूर्त में व्रत खोलना है.
ध्यान रहे कि सूर्योदय और पारण का समय शहर के अनुसार बदल सकता है. इसलिए दिल्ली से बाहर रहने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थान के अनुसार पंचांग में पारण का समय देखना चाहिए.
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