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टेक्सास में भगवान हनुमान की मूर्ति तोड़ने की बात पर भड़के पूर्व अमेरिकी सैनिक रुचिर बख्शी, जानें पूरा मामला


अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बीच टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा पर विवाद शुरू हो गया है. एक यूट्यूबर ने प्रतिमा को हटाने की मांग की. इसकेबाद हिंदू संगठनों और उनसे मिलती-जुलती सोच रखने वाले लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया.

अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म और हिंदुओं को लेकर फैलाई जा रही नफरत पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि वे ऐसे देश के लिए लड़ने नहीं गए थे, जहां बाद में उनके धर्म को निशाना बनाया जाए. बख्शी को अफगानिस्तान और इराक में युद्ध-क्षेत्र वाले मिशनों पर भेजा गया था.

बख्शी ने टेक्सास के शुगर लैंड में श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ को लेकर एक यूट्यूबर की वायरल पोस्ट पर रिएक्शन दिया. यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस ने लिखा, “जब हम जीतेंगे, तो हम इसे गिरा देंगे.” उन्होंने यह नहीं बताया कि वे किस जीत की बात कर रहे हैं, क्योंकि टेक्सास रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ है. 

यूट्यूबर को रुचिर बख्शी का तगड़ा जवाब
यूट्यूबर को जवाब देते हुए बख्शी ने लिखा, “मैं अमेरिकी सेना का कॉम्बैट वेटरन और हिंदू-अमेरिकी हूं. मैंने वर्दी इसलिए नहीं पहनी, अपना परिवार इसलिए नहीं छोड़ा और युद्ध में इसलिए नहीं गया कि कोई घटिया टॉक शो वाला व्यक्ति यह घोषणा कर सके कि जब उसका पक्ष जीतेगा तो वे मेरे धर्म के खिलाफ काम करेंगे.”

‘मंदिरों में पूजा करने वाले टैक्स देते हैं’
यूट्यूबर को हिंदू धर्म के लिए खतरा बताते हुए बख्शी ने कहा कि जो लोग इन मंदिरों में पूजा करते हैं, वे टैक्स देते हैं, बिजनेस चलाते हैं और अपने बेटे-बेटियों को उसी सेना में भेजते हैं जिसमें उन्होंने खुद सेवा की थी. उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ करने की बात करना देशभक्ति नहीं है. मैंने ईसाइयों, यहूदियों, मुसलमानों, नास्तिकों और दूसरे हिंदुओं के साथ सर्विस की है. किसी ने कभी भगवान के मामले में इस तरह से बात नहीं की. उनमें से कुछ लोग कभी घर वापस नहीं आए. उनमें से कोई भी इसलिए नहीं मरा कि आप किसी और के धर्म को बर्बाद करने के बारे में सोच सकें. 

क्या मैंने इसी देश के लिए लड़ाई लड़ी- बख्शी
उन्होंने कहा कि जब हम जीतेंगे तो इसे गिरा देंगे ये कहना देशभक्ति नहीं है. बख्शी ने कहा, “किसी दूसरे अमेरिकी समुदाय के पूजा स्थल में तोड़-फोड़ करना, सिर्फ इसलिए कि आप उसके अंदर माने जाने वाले धर्म से नफरत करते हैं, हिंदू धर्म के लिए खतरा है.” बख्शी ने लिखा, “अगर अमेरिका में जीत का मतलब हिंदू मंदिरों को तोड़ना है, तो ये वो देश नहीं होना चाहिए जिसके लिए मैंने लड़ाई लड़ी थी. आप बस उन लोगों को निशाना बनाने का लाइसेंस चाहते हैं जो आपकी तरह नहीं हैं. अमेरिका कोई धार्मिक शासन वाला देश नहीं है. आप किसी भी चीज को नहीं तोड़ सकते. न तो कानूनी तौर पर, न ही नैतिक तौर पर और न ही उस देश में जिसके लिए मैंने असल में कुर्बानी दी है.”

इन सबके बावजूद ट्रोल्स ने बख्शी को भी नहीं बख्शा. एक शख्स ने कहा कि सेवा की आड़ लेना घटियापन है क्योंकि रोम ने बर्बर लोगों को अपनी सेना में सेवा करने दिया और उन बर्बर लोगों ने ही बाद में रोम के खिलाफ रुख कर लिया. उसने कहा कि आपकी सेवा वफादारी साबित नहीं करती. अमेरिका के बारे में आपकी सोच गलत है. यह 1908 के एक नाटक पर आधारित एक समकालीन मनगढ़ंत धारणा है.

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