Headlines

‘FIR में मेरा भी नाम जोड़ लें…’, अभिजीत दीपके और सौरव दास ने ऐसा क्यों कहा?


राजस्थान के आदिवासी इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान के बीच नया विवाद सामने आया है. उदयपुर में स्कूलों के निरीक्षण के बाद पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि जिन स्कूलों की जर्जर हालत उनकी टीम ने सामने रखी, वहां के शिक्षकों को डराया-धमकाया जा रहा है. रांका ने यह भी कहा कि टीम को स्कूलों का दौरा कराने वाले ग्रामीणों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. रांका के इस दावे के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके साथ खड़े होने की बात कही.

अभिजीत दीपके ने रांका के पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि उनका नाम भी इसमें जोड़ा जाए. वहीं सौरव दास ने खुद को सरकारी स्कूलों को ठीक कराने की कोशिश में ‘सह-आरोपी’ के तौर पर शामिल करने की बात कही. इस तरह दोनों नेताओं ने रांका के उस रुख का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर उठाए गए सवालों पर कार्रवाई होने की स्थिति में खुद और अपनी टीम को भी एफआईआर में शामिल करने की चुनौती दी है.

रांका ने क्या आरोप लगाए?

आशुतोष रांका ने अपने पोस्ट में कहा कि जिन स्कूलों का उनकी टीम ने दौरा किया था, वहां की जर्जर इमारतों और बदहाल व्यवस्था की तस्वीरें पूरे देश के सामने रखी गई थीं. उनके मुताबिक अब वहां के शिक्षकों को डराया-धमकाया गया है. साथ ही, उन्हें बुलाने वाले ग्रामीणों पर एफआईआर कराने के लिए दबाव बनाए जाने की बात भी सामने आई है.

रांका ने यह भी दावा किया कि कुछ शिक्षकों ने इस तरह की कार्रवाई में सहयोग करने से इनकार कर दिया. उन्होंने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को टैग करते हुए कहा कि अगर एफआईआर कराने की बात है तो सबसे पहले उसमें उनका नाम लिखा जाए. इसके बाद उन्होंने अपनी टीम का नाम भी एफआईआर में जोड़ने को कहा. रांका ने आगे चुनौती दी कि गिरफ्तारी होने की स्थिति में वह पूरे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे. उनका कहना था कि स्कूलों की स्थिति सुधरवाने तक उनका अभियान जारी रहेगा.

अभिजीत दीपके ने कहा- मेरा नाम भी जोड़िए

रांका के ट्वीट के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी प्रतिक्रिया में उनका समर्थन किया. उन्होंने कहा कि उनका नाम भी इसमें जोड़ा जाए. उनका संदेश यह था कि सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के अभियान में वह भी रांका के साथ हैं.

इससे पहले भी दीपके राजस्थान में स्कूलों के निरीक्षण के दौरान हुए विवादों पर सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दे चुके हैं. अगस्त में जयपुर के एक सरकारी स्कूल के दौरे के दौरान हुए विवाद में भी उन्होंने सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे.

सौरव दास ने खुद को बताया ‘सह-आरोपी’

अभिजीत दीपके के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने भी रांका के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सरकारी स्कूलों को ठीक कराने के अभियान में खुद को ‘सह-आरोपी’ के रूप में जोड़ने की बात कही. दास का यह पोस्ट रांका के उस बयान के समर्थन में था, जिसमें उन्होंने एफआईआर और गिरफ्तारी की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी है.

देमात, पोंगली और बाबरी के स्कूलों का किया था निरीक्षण

दरअसल, सीजेपी की टीम ने उदयपुर के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के नयागांव तहसील के देमात, पोंगली और बाबरी समेत कई गांवों के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया था. पार्टी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी मिली. टीम ने जर्जर दीवारों, जगह-जगह उखड़े छत के प्लास्टर, खराब हैंडपंप, गंदगी और शौचालय की कमी का दावा किया.

पार्टी ने यह भी कहा कि कुछ जगह स्कूल के नाम पर सिर्फ खाली जमीन मिली, जबकि जहां स्कूल चल रहे हैं, वहां सुरक्षित भवन, पीने के पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं का अभाव है. ग्रामीणों ने भी टीम को स्कूलों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी दी. हाल की रिपोर्टों में भी खेरवाड़ा क्षेत्र के इन गांवों में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और भवनों को लेकर सीजेपी के निरीक्षण का जिक्र किया गया है.

1500 करोड़ रुपये के बजट पर भी उठाया सवाल

स्कूलों की स्थिति के साथ सीजेपी ने ट्राइबल एरिया डेवलपमेंट (टीएडी) से जुड़े करीब 1500 करोड़ रुपये के बजट के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया. पार्टी ने दावा किया कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाला बड़ा बजट पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुआ और सवाल किया कि शिक्षा, स्कूल भवन तथा बुनियादी सुविधाओं पर इसका पर्याप्त लाभ क्यों नहीं दिख रहा.

सीजेपी का कहना है कि कुछ इलाकों में ग्रामीण खुद चंदा जुटाकर स्कूलों की जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी ने सरकार और प्रशासन से स्कूलों की स्थिति सुधारने, खाली पड़ी जमीन पर भवन निर्माण कराने और आदिवासी क्षेत्र के लिए उपलब्ध विकास बजट का प्रभावी इस्तेमाल करने की मांग की है.

रांका के आरोपों पर प्रशासन के जवाब का इंतजार

आशुतोष रांका ने शिक्षकों को डराने-धमकाने और ग्रामीणों पर एफआईआर कराने के लिए दबाव बनाने का दावा किया है. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन या शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है.

यह भी पढ़िएः अपने ही गढ़ में प्रचार से हटे हुमांयू कबीर, रेजिनगर उपचुनाव में बड़ा खेल



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *