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4 F के संकट से जूझ रही दुनिया, एस जयशंकर ने UNGA में बताया समाधान


न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा, “हमें यह समझना होगा कि हमने अब तक जो कुछ भी हासिल किया है, वह सामूहिक प्रयासों से ही संभव हुआ है.” उन्होंने आगे कहा कि इसमें सबक यह है कि बेहतर की दिशा में प्रयास करते हुए जो अच्छा है, उसे सुरक्षित रखा जाए. इस दौरान उन्होंने दुनिया के सामने 4F के संकट का भी जिक्र किया. 

एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि यह लक्ष्य कई तरह के प्रयासों और पहलों के मेल से हासिल किया जा सकता है. जहां तक दुनियाभर में चल रहे संघर्षों की बात है, तो शांति के प्रयासों के साथ-साथ विशिष्ट पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि (4F) फ्यूल, फूड, फर्टिलाइजर और फाइनेंस के संकट को यूं ही नहीं छोड़ा जा सकता. 

जोखिम कम करने के प्रयास जरूरी- एस जयशंकर
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मल्टीलेटरलिज्म समिट को संबोधित करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि जब नई क्षमताएं और चिंताएं सामने आती हैं, तो नए फ्रेमवर्क और सुरक्षा उपायों (गार्डरेल्स) की आवश्यकता होती है. उन्होंने आगे कहा कि जहां बाधाओं (चोक पॉइंट्स), प्रभुत्व और व्यवधान का खतरा हो, वहां जोखिम कम करने और विविधता लाने के प्रयासों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि जहां कोई ठोस कारण या मजबूत आधार हो वहां समान विचारधारा वाले लोगों में एक साथ आने का आत्मविश्वास होना चाहिए.

मल्टीलेटरलिज्म को मजबूत करने पर जोर
उन्होंने मल्टीलेटरलिज्म (बहुपक्षवाद) को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए. विदेश मंत्री ने कहा कि ये तब सबसे अच्छी तरह से काम करेगा जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियम और मानदंडों का ईमानदारी से पालन किया जाएगा. बहुपक्षवाद को आगे बढ़ने के लिए इसके समर्थन और इसके अभ्यास दोनों को मजबूत किया जाना चाहिए. 

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