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October Weather 2026: अक्टूबर में कहां होगी भारी बारिश, कब शुरू होगी ठंड? ग्रहों की चाल में मिला बड़ा संकेत


अक्टूबर 2026 में मानसून की विदाई सीधी और शांत रहने के संकेत नहीं हैं. भारत की कुंडली, आर्द्रा प्रवेश और अक्टूबर के ग्रहयोगों को साथ रखकर देखें तो महीने के पहले हिस्से में रुक-रुककर बारिश और दूसरे हिस्से में समुद्री हलचल बढ़ने की आशंका दिखाई देती है.

उत्तर-पश्चिम भारत में गर्म और शुष्क मौसम रहेगा, लेकिन पूर्वी तट तथा दक्षिण भारत में तेज बारिश परेशानी पैदा कर सकती है. ज्योतिषीय गणना में 4 से 12 और 20 से 27 अक्टूबर के बीच का समय सबसे संवेदनशील दिखाई देता है.

शनि ने क्या बिगाड़ा?

वर्षा के ज्योतिषीय आकलन में सबसे पहले सूर्य की आर्द्रा प्रवेश कुंडली देखी जाती है. 2026 में सूर्य ने 22 जून को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश किया था. उस समय बुध, शुक्र और गुरु कर्क राशि में थे.

कर्क जल तत्व की राशि है. इसमें तीन ग्रहों की उपस्थिति वर्षा की संभावना को बल देती है, लेकिन शनि का मीन राशि में होना और वर्ष के दौरान उसका वक्री होना बारिश के समान वितरण में बाधा का संकेत देता है.

यही कारण है कि वर्षा कहीं बहुत कम और कहीं सीमित समय में बहुत अधिक हो सकती है. सितंबर तक देश में बारिश की कमी और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर इसी संकेत के अनुरूप दिखाई देता है. इसका अर्थ यह नहीं कि अक्टूबर में पूरे देश में भारी बारिश होगी.

भारत की कुंडली से क्या संकेत मिल रहे?

भारत की स्वतंत्रता कुंडली वृषभ लग्न की है. इसके तीसरे भाव की कर्क राशि में चंद्रमा, बुध, शनि, शुक्र और सूर्य स्थित हैं. देश की कुंडली में यह भाव परिवहन, संचार, पड़ोसी क्षेत्रों और छोटी दूरी की आवाजाही से जुड़ा है. कर्क राशि होने के कारण पानी, नदियों और वर्षा से जुड़ी घटनाएं भी इससे प्रभावित होती हैं.

18 सितंबर को मंगल कर्क राशि में प्रवेश कर चुका है और 12 नवंबर तक यहीं रहेगा. गुरु भी 31 अक्टूबर तक कर्क में रहेगा.

मंगल कर्क में नीच और गुरु उच्च का होता है. इसलिए गुरु नमी तथा बादलों को बढ़ाने का संकेत देता है, जबकि कमजोर मंगल मौसम को उग्र और असंतुलित बना सकता है. इसका संभावित परिणाम लगातार सामान्य बारिश के बजाय गरज-चमक, तेज हवा और कम समय में अधिक वर्षा हो सकता है.

9 अक्टूबर के बाद बदलेगा मौसम का मिजाज!

15 अगस्त 2026 से लागू भारत के वर्षफल में सिंह लग्न बनता है. वर्षकुंडली में जल तत्व और आठवें भाव की सक्रियता अचानक प्राकृतिक तथा प्रशासनिक चुनौतियों की ओर संकेत करती है. 9 अक्टूबर तक राहु की मुद्दा दशा और इसके बाद गुरु की मुद्दा दशा आरंभ होती है.

राहु अनिश्चितता, गलत अनुमान और अचानक दिशा बदलने का संकेत देता है. इसलिए अक्टूबर के शुरुआती दिनों में मानसून की वापसी रुकने या किसी नई मौसम प्रणाली के कारण बारिश लौटने की स्थिति बन सकती है. 9 अक्टूबर के बाद गुरु की अवधि शुरू होने से जल तत्व का प्रभाव बढ़ेगा. चूंकि गोचर का गुरु भी कर्क में उच्च का है, इसलिए 10 अक्टूबर के बाद बंगाल की खाड़ी और दक्षिणी क्षेत्रों की गतिविधियां अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं.

4 से 6 अक्टूबर: कर्क में तीन ग्रह

4 से 6 अक्टूबर के बीच चंद्रमा कर्क राशि में पहुंचकर मंगल और गुरु के साथ त्रिग्रही योग बनाएगा. चंद्रमा स्वयं जल और नमी का कारक है. कर्क राशि में चंद्रमा, गुरु और मंगल का साथ भारत की जन्मकुंडली के कर्क स्थित ग्रहों को भी सक्रिय करेगा.

इस अवधि में मध्य, पूर्वी और प्रायद्वीपीय भारत में गरज-चमक तथा अचानक बारिश की संभावना बढ़ सकती है. रास्तों पर पानी भरने और स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित होने का संकेत भी इसी योग से निकलता है.

10 अक्टूबर की अमावस्या क्यों अहम?

10 अक्टूबर को अमावस्या होगी. सूर्य और चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे तथा मीन का वक्री शनि उन पर सातवीं दृष्टि डालेगा. कन्या पृथ्वी तत्व की राशि है और कृषि तथा फसलों से जुड़ी मानी जाती है.

इसी समय मंगल भारत की जन्मकुंडली के बुध के अंशों को सक्रिय करेगा. बुध हवा, सूचना और यातायात का कारक है. इसलिए 8 से 12 अक्टूबर के बीच बारिश के साथ तेज हवा, बिजली गिरने अथवा परिवहन में रुकावट की आशंका अधिक रहेगी. किसानों के लिए यह अवधि कटी हुई या तैयार फसल को सुरक्षित रखने की मानी जा सकती है.

17 अक्टूबर के बाद पूर्वी तट पर बढ़ सकती है हलचल

17 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेगा, जहां शुक्र पहले से मौजूद रहेगा. तुला राशि पर कर्क स्थित मंगल की चौथी दृष्टि पड़ेगी. सूर्य, शुक्र और मंगल का यह संबंध तापमान, हवा और नमी में तेज बदलाव का संकेत देता है.

उत्तर भारत में इस समय बारिश घट सकती है, लेकिन ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पुडुचेरी अधिक संवेदनशील रहेंगे.

20 से 27 अक्टूबर सबसे संवेदनशील समय

महीने के अंतिम हिस्से में मंगल भारत की कुंडली के जन्मकालीन शनि और शुक्र के करीब पहुंचेगा. शनि भूमि तथा जनजीवन और शुक्र जल एवं नमी का कारक है. 26 अक्टूबर की पूर्णिमा इस स्थिति को और सक्रिय करेगी.

इसलिए 20 से 27 अक्टूबर के बीच तेज हवा, भारी बारिश, जलभराव अथवा समुद्री प्रणाली के मजबूत होने का सबसे अधिक खतरा दिखाई देता है. इसके बाद 31 अक्टूबर को गुरु सिंह राशि में प्रवेश करेगा. इससे कर्क राशि पर बना दोहरा दबाव कम होने लगेगा.

कुल मिलाकर उत्तर-पश्चिम भारत में अक्टूबर गर्म और शुष्क शुरू होकर रात की हल्की ठंड की ओर बढ़ेगा. पूर्वी तट और दक्षिण भारत के लिए महीने का दूसरा हिस्सा ज्यादा चुनौतीपूर्ण रह सकता है. वास्तविक भारी बारिश या चक्रवात की पुष्टि हालांकि भारतीय मौसम विभाग की तत्काल चेतावनी से ही होगी.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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