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ट्रंप के फैसले से कांग्रेस नाराज, बोली- ‘भारत के पास कई विकल्प, लेकिन…’


डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड करके आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने से असल में रोक दिया है.ट्रंप के इस फैसले पर लोग अपनी नाराजगी जता रहे हैं. इस फैसले से अमेरिका में एच-1बी वीजा पर रह रहे हजारों भारतीय पेशेवरों का ग्रीन कार्ड पाकर स्थायी रूप से बसने का सपना फिलहाल अधर में लटक गया है. ट्रंप के इस कदम की कांग्रेस ने निंदा की है.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्रंप के इस फैसले पर नाराजगी जताई है. साथ ही उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. जयराम रमेश ने लिखा, दादागिरी करने वालों को खुश करने का कोई फायदा नहीं होता.

अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा

उन्होंने लिखा, अमेरिकी सरकार ने कल सीधे तौर पर भारतीय IT प्रोफेशनल्स को निशाना बनाकर जो कदम उठाए, उनसे एक बार फिर साबित हो गया है कि दादागिरी करने वालों को खुश करने का कोई फायदा नहीं होता. यह सब तब हुआ है जब मोदी सरकार ने राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने के लिए UPI MDR चार्ज लागू किए, जिनसे साफ तौर पर अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा.

भारत के पास संसद से पहले ही पास हो चुके कानूनों, जैसे ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023’ और उसके नियमों के तहत जवाबी कार्रवाई करने के कई विकल्प मौजूद हैं. लेकिन ‘ज्ञानशगेट’ (GyaneshGate) मामले में बुरी तरह घिरे और अपनी साख खो चुके प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करेंगे.

क्या है ट्रंप सरकार का फैसला

US लेबर सेक्रेटरी कीथ सोंडरलिंग ने कहा, , ‘मैं दुनिया की कुछ सबसे बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों- कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, HCL और कैपजेमिनी को ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ से सस्पेंड कर रहा हूं.’ उन्होंने कहा, हम इन कंपनियों से जुड़े किसी भी नए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन एप्लीकेशन को स्वीकार नहीं करेंगे और न ही किसी पेंडिंग एप्लीकेशन पर आगे बढ़ेंगे.’ उन्होंने ये भी बताया है कि लेबर डिपार्टमेंट माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस प्रोग्राम से सस्पेंड कर रहा है.

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