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चारा संकट के बीच पशुपालकों के काम की खेती, एक बार बुवाई से 3 साल तक चारा


Animal Fodder: देश के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात और बारिश की कमी का असर अब पशुपालकों पर भी दिखने लगा है. खेतों में हरा चारा कम होने से गाय-भैंस पालने वाले किसानों को बाहर से चारा खरीदना पड़ रहा है. ऐसे समय में अगर किसान अपने खेत में ऐसी चारा फसल उगा लें, जिसकी एक बार बुवाई के बाद बार-बार कटाई की जा सके, तो चारे की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है. रिजका ऐसी ही चारा फसल है, जिसे रबी सीजन में बोकर लंबे समय तक पशुओं के लिए हरा और पौष्टिक चारा तैयार किया जा सकता है.

अगर आप इस रबी सीजन में रिजका बोने की तैयारी कर रहे हैं तो अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा खास तौर पर अच्छा समय माना जाता है. उत्तर भारत में इसकी बुवाई सितंबर के आखिर से दिसंबर की शुरुआत तक की जा सकती है, लेकिन अक्टूबर के मध्य का समय बेहतर माना जाता है. ICAR की कृषि सलाह में भी अक्टूबर के मध्य को रिजका की बुवाई के लिए सही है.

खेत को पहले अच्छी तरह तैयार करें

रिजका के बीज काफी छोटे होते हैं, इसलिए खेत की मिट्टी भुरभुरी और समतल होना जरूरी है. इसके लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करके पाटा लगा दें. खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि जलभराव से रिजका की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिलती है.

लाइन से बुवाई में कम बीज लगेगा

रिजका की बुवाई छिटकवां और लाइन दोनों तरीकों से की जा सकती है. लाइन से बुवाई करने पर करीब 12-15 किलो बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त माना जाता है और कतारों के बीच करीब 25-30 सेंटीमीटर दूरी रखी जा सकती है. छिटकवां बुवाई में करीब 20-25 किलो बीज की जरूरत पड़ सकती है. बीज को बहुत गहराई में न डालें, क्योंकि छोटे बीजों को अंकुरण के लिए सही गहराई और नमी चाहिए.

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बीज उपचार और सिंचाई पर दें ध्यान

रिजका दलहनी चारा फसल है, इसलिए बुवाई से पहले राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार करना फायदेमंद हो सकता है. इससे पौधों में नाइट्रोजन जुटाने की प्रक्रिया बेहतर होती है. बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी रखें और आगे की सिंचाई मिट्टी और मौसम की स्थिति देखकर करें. हर कटाई के बाद सिंचाई और जरूरत के मुताबिक खाद देना नई बढ़वार में मदद करता है.

60 दिन बाद पहली कटाई

अच्छी तरह तैयार फसल की पहली कटाई करीब 50-60 दिन बाद की जा सकती है. इसके बाद मौसम और फसल की बढ़वार के हिसाब से करीब 25-35 दिन के अंतर पर कटाई होती रहती है. अलग-अलग किस्म और प्रबंधन के हिसाब से कटाइयों की संख्या बदल सकती है. अच्छी देखभाल में रिजका से साल में कई कटाइयां ली जा सकती हैं. रिजका की कुछ किस्मों से 6-7 कटाइयों में करीब 700-800 क्विंटल हरा चारा प्रति हेक्टेयर मिलने की क्षमता बताई गई है. हालांकि असली उत्पादन मिट्टी, पानी, किस्म और खेत की देखभाल पर निर्भर करेगा.

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