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इजरायल पर गाजा में मिलिशिया को हथियार और पैसा देने का आरोप, रिपोर्ट में दावा?



<p style="text-align: justify;">गाजा में युद्धविराम के बावजूद विस्थापित फिलिस्तीनी परिवारों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. येलो लाइन के पास रहने वाले लोगों को इजरायली सेना की गोलीबारी और फिलिस्तीनी सशस्त्र गुटों (मिलिशिया) की छापेमारी का डर सताता रहता है. कई परिवार खाने, पानी और सुरक्षित जगह की कमी के बीच रहने को मजबूर हैं. ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक दावा किया गया है कि इजरायली सेना फिलिस्तीनी सशस्त्र गुटों को फंड करती है.</p>
<p style="text-align: justify;">इजरायली सेना गाजा में सक्रिय कई फिलिस्तीनी मिलिशिया समूहों को हथियार और साजो-सामान भी मुहैया कराए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े पैमाने पर की जाने वाली छापेमारी कभी-कभी इजरायली सेना के साथ मिलकर की जाती है, जिसमें इजरायली सेना कई तरह की सहायता पहुंचाते है. इस बीच जबालिया में एक फिलिस्तीनी परिवार पर हथियारबंद लोगों ने रात में हमला कर दिया, जो येलो लाइन के पास रहते हैं.&nbsp; येलो लाइन उस सीमा को कहा जाता है, जिसे अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते के तहत इजरायली सेना के कंट्रोल वाले क्षेत्र को दिखाने के लिए तय किया गया था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गाजा की येलो लाइन पर इजरायली सेना का कब्जा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इजरायली सेना के नक्शों के अनुसार, शुरुआत में गाजा का करीब 53 प्रतिशत हिस्सा इस कंट्रोल वाले एरिया में था. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाद में सेना ने अपना कंट्रोल बढ़ाकर लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र तक कर लिया. कुछ जगहों पर पीले रंग के कंक्रीट ब्लॉक इस सीमा को दिखाते हैं, लेकिन कई इलाकों में सीमा साफ दिखाई नहीं देती. इससे स्थानीय लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि इजरायली सेना उनके कितने करीब है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>विस्थापित परिवारों को मिल रही धमकियां</strong></p>
<p style="text-align: justify;">गाजा के जबलिया इलाके में कई परिवार क्षतिग्रस्त इमारतों और जबलिया सर्विसेज क्लब के आसपास शरण लिए हुए हैं. यह खेल परिसर फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNRWA ने 1950 के दशक में स्थापित किया था. युद्ध के दौरान इजरायली सेना ने इस परिसर को तबाह कर दिया था. अक्टूबर 2024 में जबलिया में सैन्य कार्रवाई के दौरान इसका इस्तेमाल बैरक और पूछताछ केंद्र के रूप में किए जाने की बात भी सामने आई थी. युद्धविराम के बाद बेघर हुए परिवारों ने इसी इलाके में शरण लेनी शुरू कर दी. यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें पीने का पानी और भोजन जुटाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. इसके अलावा, उन्हें गोलीबारी और सशस्त्र गुटों की अचानक होने वाली कार्रवाई का डर बना रहता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रात में छापेमारी और गोलीबारी का आरोप</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्थानीय निवासी सफा अल-बस्यूनी ने ड्रॉप साइट न्यूज को बताया कि पानी के टैंकर उनके इलाके तक नहीं पहुंच पाते. ऐसे में लोगों को पानी लेने के लिए दूर तक पैदल जाना पड़ता है. उन्होंने यह भी कहा कि आसपास गोलाबारी होती रहती हैं और सशस्त्र गुटों से भी खतरा बना रहता है. अचानक, वे क्वाडकॉप्टर की मदद से पूरे इलाके को घेर लेते हैं, हम पर गोलियां चलाते हैं और घरों के अंदर घुस आते हैं. खेल परिसर में रह रहे अराफात अली के मुताबिक, कुछ सशस्त्र गुट बिना चेतावनी दिए इलाके को घेर लेते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये गुट ड्रोन की मदद से निगरानी करते हैं और फिर घरों में घुसकर गोलीबारी करते हैं. उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं अक्सर रात में होती हैं और कुछ युवाओं को हिरासत में भी लिया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>येलो लाइन आगे बढ़ने से लोगों को छोड़ना पड़ा ठिकाना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट में बताया गया है कि 11 अक्टूबर को इजरायली सेना गाजा शहर के पूर्वी हिस्से शुजैया में आगे बढ़ी. आरोप है कि सेना ने पीले कंक्रीट के ब्लॉक करीब 200 मीटर आगे खिसका दिए. इसके बाद वहां रह रहे विस्थापित परिवारों में डर फैल गया और कई लोगों को अपना सामान समेटकर दूसरी जगह जाने की तैयारी करनी पड़ी.</p>
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