कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने बॉक्सिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिए हैं. इन खेलों में भारतीय बॉक्सरों ने 7 गोल्ड सहित 10 मेडल जीते हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को गोल्ड दिला चुके पूर्व बॉक्सर मनोज कुमार का मानना है कि ये तो बस शुरुआत है और पिक्चर अभी बाकी है. एबीपी से खास बातचीत में मनोज कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता के अलावा ओलंपिक्स और एशियन गेम्स पर भी बात की.
पुरुषों में सचिन सिवाच (60 किलोग्राम) और अंकुश फंगल (80 किलोग्राम) ने गोल्ड मेडल जीता. भारत की महिलाओं ने पंजा लगाते हुए 5 गोल्ड अपने नाम किए. साक्षी चौधरी (51 किलोग्राम), प्रीति पवार (54 किलोग्राम), जैसमीन लंबोडिया (57 किलोग्राम), प्रिया घनघस (60 किलोग्राम) और अरुंधति चौधरी ने 70 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मेडल जीता.
सवाल: भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग में सात गोल्ड मेडल जीते हैं. आप इस प्रदर्शन को कैसे देखते हैं?
मनोज कुमार: यह भारतीय बॉक्सिंग के भविष्य के लिए बहुत अच्छी खबर है. जिस तरह हमारे बॉक्सर्स ने प्रदर्शन किया है, उससे साफ पता चलता है कि भारतीय मुक्केबाज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. यह सफलता बताती है कि भारत में बॉक्सिंग लगातार सही दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इसके और बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे.
सवाल : एशियन गेम्स और ओलंपिक को देखते हुए भारत की तैयारियों को आप किस तरह देखते हैं?
मनोज कुमार: एशियन गेम्स और ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए हमारी तैयारियां काफी बेहतर हैं. हमारे बॉक्सर्स ने बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजों को हराकर यह साबित किया है कि उनमें दमखम की कोई कमी नहीं है. भारतीय बॉक्सिंग सही दिशा में आगे बढ़ रही है और इसका भविष्य उज्ज्वल है. मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे बॉक्सर्स एशियन गेम्स और ओलंपिक दोनों में शानदार प्रदर्शन करेंगे.
सवाल : प्रीति पवार, सचिन जैसे युवा बॉक्सर्स तेजी से आगे आ रहे हैं. आप इसे कैसे देखते हैं?
मनोज कुमार: युवा बॉक्सर्स का भविष्य बेहद उज्ज्वल है. जिस तकनीक और अनुशासन के साथ वे अभी से काम कर रहे हैं, वह उन्हें भविष्य में और बेहतर मुक्केबाज बनाएगा. लेकिन उन्हें लगातार मेहनत और ट्रेनिंग जारी रखनी होगी. यह उनके करियर का सिर्फ एक पड़ाव है. चाहे प्रीति पवार हों या अन्य युवा खिलाड़ी, उनके लिए अभी आगे बहुत बड़ा सफर बाकी है.
सवाल : ओलंपिक पदक विजेता लवलीना और शानदार फॉर्म में दिखे जादूमणि गोल्ड मेडल से चूक गए आपका क्या कहना है?
मनोज कुमार: खेल में हर दिन एक जैसा नहीं होता. किसी दिन आपकी बॉडी बहुत अच्छा रिस्पॉन्ड करती है और किसी दिन नहीं करती. यह काफी हद तक उस दिन की परिस्थितियों और प्रतिद्वंद्वी पर भी निर्भर करता है. इसका सबसे अच्छा उदाहरण नीरज चोपड़ा हैं. क्वालिफिकेशन राउंड में वह पांचवें स्थान पर थे, लेकिन फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता. इसलिए किसी एक मुकाबले के आधार पर किसी खिलाड़ी का आकलन नहीं किया जा सकता.
सवाल : सितंबर में एशियन गेम्स होने हैं. भारतीय बॉक्सिंग टीम की तैयारियां कैसी होनी चाहिए?
मनोज कुमार: अब समय बहुत कम बचा है. ऐसे में अनुभवी लोगों का एक मजबूत सेटअप तैयार किया जाना चाहिए, जो लगातार बॉक्सर्स का मार्गदर्शन करे. अगर खिलाड़ियों को अनुभवी कोच और अच्छे ट्रेनर्स की सही गाइडेंस मिलेगी, तो भारतीय बॉक्सर्स एशियन गेम्स में भी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे और देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतेंगे.
