BCCI Pension Scheme Explained: क्या आप जानते हैं कि बीसीसीआई की तरफ से सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी और उनके जैसे तमाम क्रिकेटरों को पेंशन दी जाती है. सीधा-सीधा कहें तो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके खिलाड़ियों को भारतीय बोर्ड की तरफ से पेंशन दी जाती है. पहले सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटरों को ही पेंशन दी जाती था, लेकिन अब फर्स्ट क्लास क्रिकेटरों को भी पेंशन मिलती है.
भारतीय क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे के अंतर्राष्ट्रीय संन्यास के बाद से BCCI की पेंशन स्कीम की चर्चा का विषय बनी. तमाम लोगों को तो रहाणे के रिटायरमेंट के बाद पता चला कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पेंशन भी देता है. पेशन पाने वाले खिलाड़ियों की कैटेगरी अलग-अलग होती है. घरेलू क्रिकेटर को कम पेंशन मिलती है. टेस्ट क्रिकेटरों को उनसे ज्यादा और सबसे ज्यादा पेंशन सीनियर मोस्ट खिलाड़ियों को दी जाती है.
बीसीसीआई ने जून 2022 से पेंशन की रकम में बढ़ोत्तर की थी. कुछ कैटेगिरी में 100 प्रतिशत तक का इजाफा देखने को मिला था. साथ ही आपको बताते चलें कि भारतीय बोर्ड की तरफ से खिलाड़ियों के अलावा अंपायर्स को भी पेंशन दी जाती है.
किन खिलाड़ियों को मिलती है कितनी पेंशन?
बीसीसीआई ने 2022 में पेंशन में बढ़ोत्तरी के वक्त पांच कैटेगरी की पेंशन का जिक्र किया था. इसमें 30000, 45000, 52500, 60000 और 70000 की रकम लिखी हुई थी. हालांकि बोर्ड की तरफ से यह नहीं साफ किया गया था कि किस कैटगिरी के खिलाड़ी को पेंशन के रूप में कितनी रकम मिलेगी.
इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक
फर्स्ट क्लास क्रिकेटरों को 30,000 हजार रुपये पेंशन के रूप में मिलते हैं.
2003 से पहले रिटायर हुए फर्स्ट क्लास क्रिकेटरों को 45000 रुपये की पेंशन मिलती है.
पूर्व महिला इंटरनेशनल क्रिकेटरों को 52500 रुपये मिलते हैं.
पूर्व टेस्ट क्रिकेटर को 60000 रुपये मिलते हैं.
25 से ज्यादा टेस्ट खेलने वाले पूर्व क्रिकेटरों को 70000 रुपये की रकम पेंशन के रूप में दी जाती है.
कम से कम 10 फर्स्ट क्लास मैच खेल चुके रिटायर क्रिकेटरों को 10 लाख रुपये का मेडिकल रिम्बर्समेंट मिलता है.
सचिन और धोनी जैसे खिलाड़ियों को कितनी मिलती है पेंशन?
सचिन तेंदुलकर और एमएस धोनी जैसे खिलाड़ियों को पेंशन के रूप में 70,000 रुपये मिलते हैं. इन तमाम खिलाड़ियों ने करियर में 25 से ज्यादा टेस्ट मुकाबले खेले हैं.
2004 से पेंशन दे रहा BCCI
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे क्रिकेट बोर्ड भी अपने रिटायर खिलाड़ियों को पेंशन नहीं देते हैं, लेकिन बीसीसीआई लंबे वक्त से यह लाभ देता आ रहा है. भारतीय बोर्ड 2004 से पेंशन दे रहा है, यानी इस स्कीम को चलते हुए करीब 22 साल का वक्त गुजर चुका है. उस वक्त कुल 174 खिलाड़ी और अधिकारियों को 5000 रुपये पेंशन के रूप में मिलने की बात हुई थी. उस वक्त खिलाड़ियों को पेंशन के लिए कम से के कम एक टेस्ट खेलना जरूरी था, लेकिन अब फर्स्ट क्लास क्रिकेटरों को भी इस योजना का फायदा मिलता है.
| क्र.सं. | मौजूदा मासिक पेंशन | बढ़ी हुई मासिक पेंशन |
| 1 | Rs 15,000 | Rs 30,000 |
| 2 | Rs 22,500 | Rs 45,000 |
| 3 | Rs 30,000 | Rs 52,500 |
| 4 | Rs 37,500 | Rs 60,000 |
| 5 | Rs 50,000 | Rs 70,000 |
*1 जून, 2022 से प्रभावी (BCCI की रिलीज के मुताबिक)
बीसीसीआई ने अपनी रिलीज में बताया था कि खिलाड़ियों के अलावा अंपायर को भी पेंशन मिलती है, लेकिन रकम का जिक्र नहीं किया गया, यानी पूर्व अंपायर को कितनी पेंशन मिलती है. इंटरनेट पर भी इस बारे में ज्याद कोई जानकारी मौजूद नहीं हैं.
क्या जिंदगीभर के लिए मिलती है पेंशन?
एक सवाल यह भी है कि क्या रिटायर खिलाड़ियों को बीसीसीआई जिंदगीभर के लिए पेंशन देती है? तो इसका बोर्ड की तरफ से कोई पुख्ता जवाब नहीं मिल सका है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंशन स्कीम कभी स्थायी रूप से नहीं रुकती है. हां, इतना जरूर है कि अगर खिलाड़ी किसी ऐसे रोल में आता है, जिसमें उसको सैलरी मिलने लगती है, तो फिर पेंशन रुक जाती है. लेकिन पेंशन उसी वक्त तक रुकती है जब तक पूर्व खिलाड़ी उस रोल में रहता है. यह रोल सिलेक्टर, नेशनल कोच और एडमिनिस्ट्रेटर का हो सकता है.
यह भी पढ़ें: एमएस धोनी से अजिंक्य रहाणे तक, भारत के 12 स्टार क्रिकेटरों को नहीं मिली फेयरवेल
