Ganesh Visarjan 2026: गणेश चतुर्थी पर 14 सितंबर 2026 को घर में बप्पा की स्थापना करने वाले कई परिवार 16 सितंबर को उनका विसर्जन करेंगे. इसे तीसरे दिन का गणपति विसर्जन कहा जा रहा है, लेकिन तारीख देखकर स्वाभाविक सवाल उठता है, 14 से 16 सितंबर के बीच तो केवल दो दिन हुए, फिर यह तीसरा दिन कैसे माना गया?
इस सवाल का जवाब गणना के तरीके में छिपा है. धार्मिक आयोजनों में दिन गिनते समय स्थापना वाली तारीख को छोड़ते नहीं, बल्कि उसे पहला दिन मानते हैं.
ऐसे पूरी होती है तीन दिन की गिनती
अगर गणपति की स्थापना 14 सितंबर को हुई है तो गणना इस प्रकार होगी,
- 14 सितंबर: स्थापना और पूजा का पहला दिन
- 15 सितंबर: गणेशोत्सव का दूसरा दिन
- 16 सितंबर: पूजा और विसर्जन का तीसरा दिन
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इसी कारण 16 सितंबर को किया गया विसर्जन तीसरे दिन का विसर्जन कहलाता है. यहां तीन दिन का अर्थ पूरे 72 घंटे पूरा होना नहीं है. बप्पा घर में दोपहर को विराजमान हुए हों, तब भी स्थापना वाली तारीख पूजा का पहला दिन मानी जाती है.
क्या स्थापना के ठीक 72 घंटे बाद विसर्जन जरूरी है?
गणपति विसर्जन के लिए घड़ी देखकर 72 घंटे पूरे होने की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं मानी जाती. परिवार स्थापना के समय ही संकल्प लेता है कि बप्पा को डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिनों के लिए विराजमान किया जाएगा. तीसरे दिन का संकल्प लिया गया हो तो 16 सितंबर को पूजा और उत्तर पूजा के बाद विसर्जन किया जा सकता है.
यह व्यवस्था तिथियों और धार्मिक दिनों की समावेशी गणना से जुड़ी है. शादी, व्रत और दूसरे धार्मिक अनुष्ठानों में भी आरंभ वाला दिन गणना में शामिल किया जाता है.
16 सितंबर को कब कर सकते हैं विसर्जन?
16 सितंबर को तीसरे दिन वाले गणपति की विदाई के लिए दिन में कई शुभ चौघड़िया उपलब्ध रहेंगे. नई दिल्ली के समयानुसार सुबह लगभग 10:43 से दोपहर 12:16 बजे और दोपहर 3:20 से शाम 6:25 बजे के बीच विसर्जन किया जा सकता है. शहर के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग से मिलान करना उचित रहेगा.
यदि घर में किसी विशेष समय या कुल परंपरा के अनुसार विसर्जन किया जाता है तो उसी को प्राथमिकता दी जा सकती है. नदी या सार्वजनिक जलाशय के बजाय घर में पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन करने वाले लोग साफ पात्र में प्रतिमा विसर्जित करके उस मिट्टी को बाद में पौधों में डाल सकते हैं.
विसर्जन से पहले क्या करें?
विदाई से पहले गणपति की नियमित पूजा, मोदक या फल का भोग और आरती करें. इसके बाद उत्तर पूजा करके बप्पा से पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें. प्रतिमा को स्थान से उठाने से पहले थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है.
इसलिए 14 सितंबर को स्थापना और 16 सितंबर को विसर्जन में कोई विरोधाभास नहीं है. स्थापना का दिन पहला मानने पर 16 सितंबर गणेशोत्सव का तीसरा दिन बनता है. हालांकि विसर्जन की अवधि और विधि परिवार एवं क्षेत्र की परंपरा के अनुसार बदल सकती है.
FAQs
सवाल: 14 सितंबर को स्थापना के बाद 16 सितंबर तीसरा दिन कैसे होगा?
जवाब: धार्मिक गणना में स्थापना वाली तारीख पहला दिन होती है. इसलिए 14 सितंबर पहला, 15 सितंबर दूसरा और 16 सितंबर तीसरा दिन माना जाएगा.
सवाल: क्या तीन दिन के विसर्जन के लिए 72 घंटे पूरे होना जरूरी है?
जवाब: नहीं. तीन दिन का अर्थ तीन धार्मिक या कैलेंडर दिन होता है. स्थापना के ठीक 72 घंटे बाद ही विसर्जन करने की अनिवार्यता नहीं मानी जाती.
सवाल: 16 सितंबर 2026 को गणपति विसर्जन कर सकते हैं?
जवाब: हां. 14 सितंबर को स्थापना करने वाले परिवार अपने संकल्प और पारिवारिक परंपरा के अनुसार 16 सितंबर को तीसरे दिन का विसर्जन कर सकते हैं.
सवाल: तीसरे दिन विसर्जन का संकल्प लिया हो और उस दिन संभव न हो तो क्या करें?
जवाब: ऐसी स्थिति में परिवार की परंपरा और धर्माचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार अगले प्रचलित विसर्जन दिवस का चयन किया जा सकता है.
सवाल: गणपति विसर्जन से पहले कौन-सी पूजा करनी चाहिए?
जवाब: विसर्जन से पहले भोग, आरती और उत्तर पूजा की जाती है. पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगकर सम्मानपूर्वक बप्पा को विदाई दी जाती है.
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