देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 रद्द होने के बाद लाखों छात्रों और उनके परिवारों में निराशा, तनाव और असमंजस का माहौल है. कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने महीनों तक लगातार मेहनत की, सामाजिक कार्यक्रमों और त्योहारों से दूरी बनाई, लेकिन अब दोबारा परीक्षा की तैयारी का दबाव उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहा है. परीक्षा रद्द होने की खबर सामने आने के बाद कई छात्र सीधे अपने कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों से मिलने पहुंचे ताकि आगे की रणनीति समझ सकें.
“पहले लगा अफवाह है, फिर सच पता चला”
छात्रों राजश्री, राधिका, निकुंज और श्रवणी सहित कई अभ्यर्थियों ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि परीक्षा रद्द होने की खबर सिर्फ अफवाह है. लेकिन जब आधिकारिक जानकारी सामने आई तो वे काफी परेशान हो गए. छात्रों ने कहा कि परीक्षा अच्छी गई थी और अब फिर से उसी स्तर की तैयारी करना मानसिक रूप से बेहद कठिन लग रहा है.
भावुक हो गए छात्र
विद्यार्थियों का कहना है कि वे रोजाना कई घंटों तक पढ़ाई करते रहे, परिवार और सामाजिक जीवन से दूरी बनाकर सिर्फ परीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया. ऐसे में अचानक परीक्षा रद्द होने का फैसला उनके लिए बड़ा झटका है. नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र राकेश ने कहा कि मेरे पिताजी थोड़ी बहुत खेती करके खर्चा चलाते हैं अब जिंदगी में कुछ रहा नहीं, 4 साल हो गए NEET की तैयारी करते, पैसे भी लग गये.. और ये कहते हुए छात्र भावुक हो गया.
परीक्षार्थी ने बताया कि हर साल क़रीब 2 से 2.5 लाख रुपये तैयारी के दौरान खर्चा होता हैं, अब पेपर रद्द हो गया अब हम कुछ नहीं कर सकते इसमें NTA वालों की गलती है कि उन्होंने इसमें सही से नहीं देखा.
कुछ छात्रों ने एनटीए के फैसले को ठहराया सही
वहीं एक और छात्रा ने कहा कि बच्चों ने एक साल इतनी मेहनत की है. इतनी मेहनत करने के बाद भी बच्चे 500 से 600 नंबर ला रहे हैं और कुछ लोग चीटिंग करके 720 में से 700 नंबर ला रहे हैं जो कि देश को पीछे ले जाने वाला काम है और ऐसे लोग कभी अच्छे डॉक्टर नहीं बन पाएंगे. इसके बाद छात्रा ने कहा कि परीक्षा को रद्द करने का एनटीए का फैसला एक दम सही है.
नीट की तैयारी कर रहे छात्र शुभम ने बताया कि मैंने 12वीं के साथ नीट का एग्जाम दिया था. मेरे 500 के आसपास नंबर आ रहे थे, लेकिन अब नीट रद्द हो गया है तो हमें इससे एक और चांस मिल जाएगा. पेपर लीक से बच्चों के साथ गलत तो हुआ है, लेकिन नीट दोबारा होगा तो हम अच्छा स्कोर करेंगे.
“भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों?”
छात्रों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं. उनका कहना है कि हर बार मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को ही मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है. कई छात्रों ने सवाल उठाया कि जब पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं तो परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी क्यों नहीं बनाया गया.
कुछ विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षा के बाद वे मानसिक रूप से थोड़ा रिलैक्स हो गए थे, लेकिन अब दोबारा तैयारी शुरू करने का दबाव उनके साथ-साथ पूरे परिवार को प्रभावित करेगा. छात्रों के मुताबिक उनके माता-पिता भी लंबे समय से उनके साथ इस परीक्षा के तनाव को झेल रहे थे.
छात्रों ने फैसले को बताया जरूरी
वहीं कई विद्यार्थियों और अभिभावकों ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का समर्थन भी किया. उनका कहना है कि अगर पेपर लीक या अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोबारा परीक्षा कराना जरूरी है. छात्रों ने कहा कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को तभी न्याय मिलेगा जब परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी माहौल में आयोजित हो.
वहीं परिजनों ने कहा कि बच्चों ने दिन-रात मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की थी और पेपर लीक जैसी खबरों ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया. ऐसे में सरकार और National Testing Agency द्वारा उठाया गया कदम परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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परीक्षा प्रणाली को और सुरक्षित बनाने की मांग
छात्रों और अभिभावकों ने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और मजबूत और सुरक्षित बनाया जाए. उनका कहना है कि तकनीकी निगरानी, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और समय पर कार्रवाई जैसे कदम जरूरी हैं ताकि ईमानदारी से मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का भरोसा बना रहे और उन्हें बार-बार मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े.
