भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने टेस्ट क्रिकेट को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है. उनका मानना है कि इंटरनेशनल क्रिकेट को ज्यादा महत्व दिए जाने की जरूरत है, जबकि टेस्ट क्रिकेट को बचाने के लिए ICC समेत क्रिकेट से जुड़े सभी पक्षों को गंभीरता से काम करना चाहिए. हरभजन ने वनडे क्रिकेट को लेकर भी अपनी राय किसी से छिपाई नहीं. उन्होंने कहा कि उन्हें अब इस फॉर्मेट में खास दिलचस्पी नहीं है और वह टेस्ट क्रिकेट देखने के लिए पैसे खर्च करने को भी तैयार हैं.
‘मैं टेस्ट क्रिकेट देखने के लिए पैसे दूंगा’
हरभजन सिंह ने PTI से बातचीत में कहा, “मुझे लगता है कि इंटरनेशनल क्रिकेट को ज्यादा ध्यान मिलना चाहिए, क्योंकि इसका अपना अलग मजा है. अगर भारत ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेल रहा है, तो मैं उसे देखना पसंद करूंगा. मैं टेस्ट क्रिकेट देखने के लिए पैसे दूंगा.”
उन्होंने वनडे क्रिकेट को लेकर कहा, “मुझे ODI क्रिकेट में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है. मैं इसे देख चुका हूं और यह खत्म हो चुका है.” टेस्ट क्रिकेट को लेकर हरभजन की राय और भी स्पष्ट थी. उन्होंने कहा, “मेरी राय में टेस्ट क्रिकेट ही मुख्य क्रिकेट है और इसे जिंदा रखने के लिए जो भी करने की जरूरत है, ICC और बाकी सभी लोगों को वह करना चाहिए.”
फ्रेंचाइजी क्रिकेट ने बदली फैंस की पसंद
हरभजन ने क्रिकेट में फ्रेंचाइजी लीग के बढ़ते प्रभाव पर भी बात की. उनका मानना है कि खेल का एक बड़ा हिस्सा पहले ही बदल चुका है और इंटरनेशनल क्रिकेट की जगह कुछ हद तक फ्रेंचाइजी क्रिकेट ने ले ली है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि 70 प्रतिशत बदलाव पहले ही हो चुका है. अगर मैं इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करूं और भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया या भारत में खेलता है, तो उसे देखने वाले लोग होते हैं. लेकिन अगर भारत श्रीलंका या अफगानिस्तान के खिलाफ खेलता है, तो उतनी व्यूअरशिप नहीं होती.”
हरभजन ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट की लोकप्रियता का उदाहरण देते हुए कहा, “लेकिन जब द हंड्रेड या BBL की बात आती है, तो मैदान भरे रहते हैं. IPL में लोगों को टिकट नहीं मिल पाते. इसलिए यह संस्कृति पहले ही बन चुकी है.” उन्होंने आगे कहा, “लोगों की दिलचस्पी सिर्फ उन दो महीनों में रहती है. इसलिए यह बदलाव आ चुका है. इंटरनेशनल क्रिकेट थोड़ा पीछे चला गया है. इसे दोबारा वहां तक ले जाना जहां यह पहले था, शायद थोड़ा मुश्किल होगा.”
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अश्विन भी ODI के भविष्य पर उठा चुके हैं सवाल
वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर रविचंद्रन अश्विन भी अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं. 2026 की शुरुआत में उन्होंने 2027 वर्ल्ड कप के बाद इस फॉर्मेट की स्थिति को लेकर अनिश्चितता जताई थी. अश्विन ने कहा था, “मैं 2027 वर्ल्ड कप के बाद ODI के भविष्य को लेकर निश्चित नहीं हूं. मैं इसे लेकर थोड़ा चिंतित हूं.” उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी का उदाहरण देते हुए यह भी बताया था कि विराट कोहली और रोहित शर्मा के खेलने से लोगों की दिलचस्पी बढ़ी. अश्विन ने कहा था, “हम जानते हैं कि खेल हमेशा खिलाड़ियों से बड़ा होता है, लेकिन कई बार इन खिलाड़ियों को वापस आना पड़ता है ताकि खेल प्रासंगिक बना रहे.”
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